सूबे के स्कूलों में पढ़ रहे बच्चों में अब भी 61 लाख से अधिक बच्चे मध्याह्न भोजन का लाभ नहीं ले पा रहे हैं। पिछले दिनों राज्य सरकार ने मध्याह्न भोजन को लेकर जांच की तो उसमें यह सच सामने आया।

अब शिक्षा विभाग ने इन छूटे बच्चों में से अधिक से अधिक बच्चों को मध्याह्न भोजन के नेट में लाने की योजना बनायी है। इसके लिए सभी जिलों को विशेष टास्क सौंपा गया है। इसी आधार पर छूटे बच्चों को मध्याह्न भोजन का लाभ दिलाया जाएगा।

मध्याह्न भोजन योजना के तहत विद्यालयों में उपस्थित शत प्रतिशत छात्रों को योजना से लाभानिव्त करना प्रमुख लक्ष्य है। इस समय 70333 प्रारंभिक विद्यालयों में नामांकित 1,79,71, 446 बच्चों में केवल 1,18, 20, 501 बच्चों को ही मध्याह्न भोजन योजना का लाभ मिल पा रहा है।

शेष बच्चे इससे दूर हैं। सरकार के लिए यही चिंता की बात है। इसीलिए शिक्षा विभाग ने शेष बचे सारे बच्चों को इस योजना के दायरे में लाने की योजना बनायी है।

विभाग का कहना है कि वर्ष 2023-24 में वह शेष बचे 61 लाख बच्चों में से अधिक से अधिक को इस योजना में शामिल कर लेगा। इसके लिए सभी जिलों में विशेष अभियान चलाया जाएगा।

दरअसल, मध्याह्न भोजन योजना का नाम अब बदलकर पीएम पोषण शक्ति निर्माण योजना किया गया है। इस योजना के तहत प्राथमिक व मध्य विद्यालयों में छीजन रोकने, नामांकित बच्चों का ठहराव सुनिश्चित करने और उनके पोषण के उद्देश्य से सुप्रीम कोर्ट के निदेशानुसार सभी सरकार व सरकारी सहायता प्राप्त प्रारंभिक विद्यालयों में वर्ग 1-8 तक के अध्ययनरत बच्चों को मध्याह्न भोजन उपलब्ध कराया जाता है।

इनमें 64641 विद्यालयों में मध्याह्न भोजन विद्यालय शिक्षा समिति एवं 5747 विद्यालयों में स्वयंसेवी संस्थाओं के माध्यम से संचालित है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *