भागलपुर पत्नी के प्रेम में लाखों रुपये खर्च करने की कहानी के बीच भागलपुर के जिला शिक्षा विभाग में 98 लाख 12 हजार 773 रुपये के कथित गबन का मामला सामने आया है। आरोप है कि फर्जी शिक्षिका के नाम पर पहचान और लॉगिन आईडी का इस्तेमाल कर सरकारी राशि का भुगतान कराया गया। इस मामले में संविदा ऑपरेटर अविनाश राज की भूमिका भी जांच के घेरे में है। हालांकि, पत्नी के प्रेम या उस पर रकम खर्च करने से जुड़े दावे की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं हुई है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए डीएम डॉ. अलंकृता पांडेय के निर्देश पर गठित तीन सदस्यीय जांच टीम शुक्रवार को जिला शिक्षा कार्यालय पहुंची। टीम ने करीब छह घंटे तक वेतन भुगतान से संबंधित फाइलों, अभिलेखों और ऑनलाइन प्रक्रिया की जांच की। जांच में पुराने और वर्तमान पदाधिकारियों की भूमिका भी खंगाली जा रही है।
विभागीय सूत्रों के अनुसार, कथित फर्जी शिक्षिका तनुश्री की ऑनलाइन प्रक्रिया अप्रैल 2025 में पूरी हुई थी। इसके बाद अप्रैल 2026 में उसके नाम पर शुरुआती वेतन भुगतान किया गया। आरोप है कि फर्जी पहचान के जरिए सरकारी राशि निकाली गई। अविनाश राज को 9 जून 2026 को सेवा से हटा दिया गया था, लेकिन इसके बावजूद उसकी लॉगिन आईडी के इस्तेमाल को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
जांच टीम यह पता लगाने में जुटी है कि वेतन बिल किसने तैयार किया, भुगतान की स्वीकृति किस स्तर पर मिली और सत्यापन की प्रक्रिया में कहां चूक हुई। विभागीय सूत्रों के मुताबिक, तनुश्री का नाम ई-शिक्षाकोष पोर्टल पर नहीं था, जबकि उसका रिकॉर्ड मानव संसाधन प्रबंधन प्रणाली (एचआरएमएस) पोर्टल पर बताया गया है।
इस मामले में उच्च वर्गीय लिपिक शिशिर कुमार झा को निलंबित किए जाने की जानकारी भी सामने आई है। प्रशासन अब पूरे भुगतान तंत्र की समीक्षा कर रहा है। जांच रिपोर्ट के बाद अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों पर भी कार्रवाई हो सकती है।
फिलहाल, पत्नी के प्रेम में रकम खर्च करने की बात को लेकर कोई पुष्ट प्रमाण सामने नहीं आया है। जांच का मुख्य केंद्र 98.12 लाख रुपये के कथित गबन और इसमें शामिल लोगों की भूमिका है।








