बिहार में कृषि क्षेत्र को आधुनिक और पारदर्शी बनाने की दिशा में सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। अब किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) के तहत लोन पाने के लिए लंबी प्रक्रियाओं से नहीं गुजरना पड़ेगा। नई डिजिटल व्यवस्था के तहत ‘फार्मर आईडी’ के जरिए किसानों को मात्र 15 मिनट में लोन उपलब्ध कराया जाएगा।

इस पहल का सबसे अहम पहलू यह है कि किसानों को अब किसी भी प्रकार के भौतिक दस्तावेज जमा करने की जरूरत नहीं होगी। ‘फार्मर आईडी’ में किसान की जमीन, फसल, बैंक खाता और अन्य जरूरी जानकारियां पहले से ही दर्ज रहेंगी। इससे बैंक लोन की प्रक्रिया तेज और आसान हो जाएगी, जिससे किसानों को समय पर आर्थिक मदद मिल सकेगी।

राज्य सरकार इस व्यवस्था को मजबूत करने के लिए ‘बिहार कृषि ऐप’ और ‘फार्मर रजिस्ट्री’ को तेजी से विकसित कर रही है। इन डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के जरिए किसानों का डेटा सुरक्षित और व्यवस्थित रखा जाएगा, जिससे योजनाओं का लाभ सीधे पात्र किसानों तक पहुंच सके।

अब तक राज्य में 45 लाख से अधिक किसानों का पंजीकरण किया जा चुका है, जो कुल लक्ष्य का 50 प्रतिशत से भी ज्यादा है। यह प्रक्रिया प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के लाभार्थियों के आधार पर आगे बढ़ाई जा रही है। कृषि विभाग के प्रधान सचिव ने इस कार्य की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को निर्धारित समय सीमा के भीतर लक्ष्य पूरा करने के निर्देश दिए हैं।

इस डिजिटल पहल का एक और बड़ा फायदा यह होगा कि प्राकृतिक आपदाओं जैसे बाढ़ या सूखा के समय सरकार सीधे प्रभावित किसानों के खातों में राहत राशि ट्रांसफर कर सकेगी। इससे राहत वितरण में देरी और गड़बड़ी की संभावना कम होगी।

सरकार इस पूरी परियोजना पर करीब 450 करोड़ रुपये खर्च कर रही है। ‘फार्मर आईडी’ लागू होने से पारदर्शिता बढ़ेगी और किसानों को बिचौलियों व दलालों से मुक्ति मिलेगी। अब योजनाओं का लाभ सीधे असली किसानों के खातों में पहुंचेगा, जिससे कृषि क्षेत्र में भरोसा और मजबूती दोनों बढ़ेगी।

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