बिहार में 8 करोड़ 30 लाख लोग सरकारी राशन के लाभुक हैं, लेकिन राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत आधार सीडिंग यानी ई-केवाईसी अनिवार्य होने के बावजूद केवल 6 करोड़ 74 लाख राशन कार्डधारियों का ही केवाईसी पूरा हुआ है। इससे लगभग 1 करोड़ 56 लाख लाभुकों के राशन कार्ड पर संकट उत्पन्न हो गया है और उन्हें राशन मिलने पर रोक लग सकती है।
पूर्वी चंपारण में 42 लाख 12 हजार राशन कार्डधारी हैं, जबकि अरवल में यह संख्या केवल 4 लाख 58 हजार है। अरवल, कैमूर और बक्सर में 90 प्रतिशत से अधिक राशन कार्ड का ई-केवाईसी हो चुका है, लेकिन सीतामढ़ी, सिवान और वैशाली में स्थिति चिंताजनक है। सीतामढ़ी में 6 लाख, वैशाली में 6 लाख 20 हजार और सिवान में 5 लाख 83 हजार लाभुकों का केवाईसी लंबित है।
खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री लेसी सिंह ने ईटीवी भारत से बातचीत में बताया कि जिन राशन कार्डधारियों के डेटा में गड़बड़ी होगी, उनका नाम काटा जा सकता है। उन्होंने कहा कि सरकार लगातार नए राशन कार्ड बना रही है और इच्छुक लाभुकों के आवेदन की जांच भी जारी है। मंत्री ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के निर्देश का हवाला देते हुए कहा कि कोई भी गरीब व्यक्ति भूखा नहीं सोएगा।
आरंभ में 15 फरवरी तक केवाईसी की समय सीमा थी, जिसे अब बढ़ाकर 28 फरवरी कर दिया गया है। लगभग 80 प्रतिशत राशन कार्डधारियों का केवाईसी पूरा हो चुका है, लेकिन 20 प्रतिशत यानी डेढ़ करोड़ से अधिक लाभुक अब भी लंबित हैं।
बिहार से बाहर रहने वाले राशन कार्डधारी भी चिंता न करें, क्योंकि “वन नेशन, वन राशन” योजना के तहत किसी भी राज्य में जाकर ई-केवाईसी कराई जा सकती है। ई-केवाईसी न करने पर लगभग 50 लाख नाम कटने का खतरा है, जिसमें फर्जी नाम भी शामिल हैं।
राशन कार्डधारी अपने नजदीकी जन वितरण प्रणाली दुकान पर स्थापित ई-पोस् (e-Pos) यंत्र के माध्यम से निशुल्क बायोमेट्रिक या आईरिस स्कैन से ई-केवाईसी कर सकते हैं। इसके अलावा, फेशियल ई-केवाईसी मोबाइल ऐप के माध्यम से भी सुविधा उपलब्ध है, हालांकि कुछ राज्यों में यह सुविधा अभी लागू नहीं है।
