सहरसा, 8 जनवरी 2026।
बिहार के सहरसा जिले में वायु प्रदूषण ने सभी पुराने रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए हैं। 8 जनवरी 2026 की संध्या 7:42 बजे लाइव वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI.in) के अनुसार सहरसा का AQI (US) 537 दर्ज किया गया, जो ‘Hazardous’ यानी अत्यंत जानलेवा श्रेणी में आता है। यह स्तर न केवल राष्ट्रीय मानकों, बल्कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमाओं से भी कई गुना अधिक है। विशेषज्ञों के अनुसार यह स्थिति सीधे तौर पर आम नागरिकों के स्वास्थ्य और जीवन पर गंभीर खतरा बन चुकी है।
उपलब्ध आँकड़ों के अनुसार सहरसा में PM2.5 का स्तर 344 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर और PM10 का स्तर 524 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज किया गया। WHO के मानकों के मुताबिक PM2.5 का सुरक्षित स्तर 5 µg/m³ और PM10 का 15 µg/m³ माना जाता है। इन मानकों की तुलना में सहरसा की हवा कई गुना अधिक जहरीली हो चुकी है। लगातार इस तरह की हवा में सांस लेना बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और पहले से बीमार लोगों के लिए बेहद खतरनाक माना जा रहा है।
हैरानी की बात यह है कि सहरसा कोई बड़ा औद्योगिक नगर नहीं है। यहाँ न तो भारी उद्योग हैं और न ही बड़े पैमाने पर फैक्ट्रियाँ, फिर भी AQI का इस हद तक पहुँचना प्रशासनिक लापरवाही और अव्यवस्था की ओर साफ इशारा करता है। शहर में जगह-जगह कचरा जलाना, बिना ढंके निर्माण कार्य, सड़कों पर उड़ती धूल, पुराने और प्रदूषण फैलाने वाले वाहन, तथा हरित क्षेत्रों की लगातार हो रही कटाई इस भयावह स्थिति के प्रमुख कारण बताए जा रहे हैं।
इस गंभीर मसले पर कोशी विकास संघर्ष मोर्चा के संस्थापक अध्यक्ष बिनोद कुमार झा ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा,
“सहरसा कोई औद्योगिक शहर नहीं है। इसके बावजूद यहाँ का AQI देश के कई महानगरों से भी ज्यादा होना यह साबित करता है कि जिला प्रशासन और नगर निगम ने अपने कर्तव्यों का घोर उल्लंघन किया है। यह केवल लापरवाही नहीं, बल्कि जनस्वास्थ्य के साथ सीधा अपराध है।”
उन्होंने यह भी कहा कि अब यह समस्या सिर्फ पर्यावरणीय चिंता तक सीमित नहीं रही, बल्कि एक पूर्ण जनस्वास्थ्य आपातकाल का रूप ले चुकी है।श्री झा ने प्रशासन पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि समय रहते कड़े कदम उठाए जाते, तो स्थिति इतनी भयावह नहीं होती। शहर में धूल नियंत्रण के लिए पानी का छिड़काव, निर्माण स्थलों पर नियमों का पालन, कचरा प्रबंधन और हरित क्षेत्र बढ़ाने जैसे बुनियादी कदम भी ज़मीनी स्तर पर नज़र नहीं आते। नतीजतन आम जनता को जहरीली हवा में सांस लेने को मजबूर होना पड़ रहा है।
कोशी विकास संघर्ष मोर्चा ने इस संकट को देखते हुए कई तात्कालिक माँगें रखी हैं। मोर्चा की प्रमुख माँग है कि सहरसा में वायु प्रदूषण को देखते हुए AQI को स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किया जाए। इसके साथ ही शहर में कचरा जलाने पर तत्काल और पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए तथा दोषियों पर सख्त दंडात्मक कार्रवाई हो। सड़कों और निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण के लिए ठोस और प्रभावी व्यवस्था लागू की जाए।
इसके अलावा स्कूलों, बच्चों, बुजुर्गों और रोगियों के लिए विशेष स्वास्थ्य एडवाइजरी जारी करने की माँग की गई है, ताकि लोग समय रहते सावधानी बरत सकें। मोर्चा ने दीर्घकालिक समाधान के रूप में हरित क्षेत्रों को बढ़ाने के लिए एक ठोस और समयबद्ध कार्ययोजना बनाने की भी माँग की है।
वायु प्रदूषण का असर अब शहर के अस्पतालों में भी दिखने लगा है। डॉक्टरों के अनुसार पिछले कुछ दिनों में सांस की तकलीफ, आंखों में जलन, खांसी, अस्थमा और एलर्जी से जुड़े मरीजों की संख्या में इजाफा हुआ है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर हालात ऐसे ही बने रहे तो आने वाले दिनों में स्वास्थ्य संकट और गहरा सकता है।
इस मुद्दे पर मोर्चा के संरक्षक प्रवीण आनंद ने भी गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा,“यह AQI भविष्य के लिए नहीं, बल्कि वर्तमान के लिए भी भयावह है। अगर अभी नहीं चेते, तो आने वाली पीढ़ियाँ हमें माफ़ नहीं करेंगी।”उन्होंने आम जनता से अपील की कि वे इसे केवल प्रशासन की जिम्मेदारी न समझें, बल्कि सामूहिक दायित्व मानकर प्रदूषण के खिलाफ एकजुट हों।मोर्चा ने प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र और प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो कोशी विकास संघर्ष मोर्चा सहरसा में अनिश्चितकालीन जनआंदोलन शुरू करने के लिए बाध्य होगा। इस आंदोलन से उत्पन्न होने वाली किसी भी स्थिति की सम्पूर्ण जिम्मेदारी जिला प्रशासन और नगर निगम की होगी।
कुल मिलाकर सहरसा में वायु प्रदूषण अब एक गंभीर संकट का रूप ले चुका है। यह सिर्फ आँकड़ों की लड़ाई नहीं, बल्कि हर नागरिक के जीवन और स्वास्थ्य से जुड़ा सवाल है। समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो यह ‘अत्यंत जानलेवा’ हवा आने वाले दिनों में और भी भयावह परिणाम दे सकती है।
रिपोर्ट . इन्द्रदेव . सहरसा .
