बिहार के जिलों में अब स्वास्थ्य सेवाएं भी प्रभावित होने लगी हैं। गैस की कमी के कारण आम लोगों के लिए नर्सिंग अस्पताल में जीविका दीदियों द्वारा संचालित ‘दीदी की रसोई’ को बंद कर दिया गया है। यह रसोइया मुख्य रूप से अस्पताल में भर्ती भर्ती और उनके साथियों को भोजन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से दिया गया था।

बताया जा रहा है कि गैस प्लांटों की नियमित आपूर्ति नहीं होने के कारण रसोई का संचालन मुश्किल हो गया है। उपलब्ध सामग्री से अधिकतम दो दिन तक के लिए ही भोजन की व्यवस्था संभावित बताई जा रही है। ऐसे में जीविका दीदियों ने अस्पताल प्रशासन को पत्र लिखकर चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही गैस आपूर्ति सामान्य नहीं हुई तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।

जीविका दीदियों ने सिविल सर्जन और अस्पताल के उपाधीक्षक को दिए गए पत्र में कहा है कि जीविका के तीन समय के भोजन के मेनू में बदलाव करने की मांग की गई है। उनका कहना है कि कम गैस आर्किटेक्चर वाले रसायनों को प्लाट दे दिया जाए, इसलिए सीमित मात्रा में और अधिक दिनों तक रसोई किचन बनाए रखा जाए। किसी भी तरह की खोज के लिए, किसी भी तरह की खोज के लिए, किसी भी तरह के किसी भी तरह के बहिष्कार के लिए, किसी भी तरह के किसी भी तरह के बहिष्कार के लिए, किसी भी तरह की चीजें तैयार कर रही हैं।

रसोईया कंचन देवी ने बताया कि मृतकों की पसंद को देखते हुए आम लोगों और रिश्तेदारों के लिए कैंटीन सेवा को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है। इस अस्पताल में आने वाले बाहरी लोगों के लिए भोजन की वैकल्पिक व्यवस्था करन पैड रही है।

‘दीदी की रसोई’ की सचिव प्रभावती देवी ने भी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि गैस की कमी के कारण रसोई चलाना बेहद मुश्किल हो गया है। उन्होंने बताया कि वे गोदामों से गोदामों में काम कर रहे हैं, लेकिन यह स्थायी समाधान नहीं है।

अस्पताल प्रशासन ने कहा है कि गैस आपूर्ति की समस्या पर लगातार नजर रखी जा रही है और समाधान के प्रयास किये जा रहे हैं। प्रशासन ने जिला स्तर पर संबंधित विवरणों से संपर्क कर सहायता की सुविधा प्रदान की है।

दरअसल, इन दिनों बिहार के कई सब्जियों में रसोई गैस की कमी की मांग सामने आ रही है। डॉक्टर अस्पताल का यह मामला भी एक संकटग्रस्त की सूची में शामिल है। यदि शीघ्र आपूर्ति सामान्य नहीं हुई तो इसका असर स्वास्थ्य सेवाओं पर भी पड़ सकता है।

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