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बिहार में पिछले तीन वर्षों से शारीरिक शिक्षा एवं स्वास्थ्य अनुदेशक एक बड़ी विडंबना का शिकार हो रहे हैं। मात्र 8000 रुपये की मानदेह पर मिडिल स्कूलों में काम कर रहे इन अनुदेशकों को ना तो अब तक पूर्णकालिक का दर्जा मिला है और ना ही वह सम्मान, जो एक शिक्षक को मिलना चाहिए। महंगाई की मार, परिवार का बोझ और दूर-दराज जिलों में 100 से 200 किलोमीटर तक की ड्यूटी—इन सबके बीच ये अनुदेशक संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन सरकार की ओर से उन्हें सिर्फ अनदेखी और आश्वासन ही मिल रहा है।

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इन अनुदेशकों ने अपनी बात सरकार तक पहुंचाने के हर संभव प्रयास किए हैं। छोटे अधिकारियों से लेकर मुख्यमंत्री तक आवेदन दिए जा चुके हैं, लेकिन नतीजा शून्य रहा। ना ही कोई स्पष्ट नीति बनी, ना ही कोई ठोस जवाब मिला। इन अनुदेशकों की एक ही मांग है कि उन्हें पूर्णकालिक शिक्षक घोषित किया जाए और पूर्व के शारीरिक शिक्षकों की तरह वेतन और सम्मान दिया जाए।

अभी की स्थिति में इन्हें “अंशकालिक”  बताया जाता है, लेकिन उनसे पूरा काम लिया जा रहा है। सुबह से स्कूल खुलने से लेकर खेलकूद, स्वास्थ्य जागरूकता और अन्य शारीरिक गतिविधियों का पूरा दारोमदार इन्हीं अनुदेशकों पर होता है। इसके बावजूद सरकार इन्हें ना तो शिक्षक मान रही है और ना ही पूर्णकालिक कर रही है।

सबसे चिंता की बात यह है कि जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार खुद हर वर्ग की समस्याएं सुनने और सुलझाने का दावा करते हैं, तब इस वर्ग की अनदेखी क्यों हो रही है? क्या इन अनुदेशकों की आवाज़ इतनी कमजोर है कि वह सत्ता के गलियारों तक नहीं पहुंच पा रही है?

बीते वर्षों में कई बार इन अनुदेशकों ने जिला स्तर से लेकर पटना तक सड़कों पर उतर कर आंदोलन किया। लेकिन उन्हें मिला क्या? लाठीचार्ज, गिरफ्तारी और सिर्फ खोखले वादे। सवाल उठता है कि जब एक शिक्षक समाज का निर्माता होता है, तो उसी शिक्षक को इस तरह क्यों दर-दर भटकना पड़ रहा है?

सरकार से इन अनुदेशकों की सिर्फ एक अपील है—उन्हें पूर्णकालिक किया जाए, वेतनमान सुधारा जाए और पूर्व के शारीरिक शिक्षकों की तरह गिनती में लाकर समान अधिकार दिया जाए।

आज ये अनुदेशक ना केवल अपने हक के लिए लड़ रहे हैं, बल्कि उन हजारों छात्रों के भविष्य के लिए भी खड़े हैं, जिनकी नींव वो मजबूत करने का कार्य कर रहे हैं। यह समय है कि सरकार इस वर्ग की सुध ले और इनके संघर्ष को उचित सम्मान दे। अन्यथा यह अन्याय सामाजिक असंतुलन का कारण बन सकता है।

 

 

 

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By admin

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