पटना: केंद्रीय मंत्री और के बीच तल्ख रिश्ते की कहानी कोई नई बात नहीं है, लेकिन फिर अब पूर्वी यूरोपियन समाज ने एक पुरानी घटना का जिक्र कर इस विवाद को चर्चा में ला दिया है। उन्होंने बताया कि एक समय ऐसा भी था जब पंपिंग, ललन सिंह को देखने तक पसंद नहीं करते थे।

तिवारी ने अपने फेसबुक पोस्ट में 1991 के लोकसभा चुनाव के बाद की एक घटना का जिक्र किया। उस समय वे ललन सिंह और अन्य नेताओं के साथ दिल्ली स्थित बिहार भवन में थे। जहां उन्हें पता चला कि वहां पर वामपंथी यादव भी मौजूद हैं। नीतीश कुमार के आगमन पर सभी लोग हमसे मिल रहे थे, हालांकि ललन सिंह इस मुलाकात को लेकर उत्साहित थे।

जब सभी लोग मुख्यमंत्री कक्ष में थे तो लिपिबद्ध यादव एक फाइल देख रहे थे और उन्होंने किसी की ओर ध्यान नहीं दिया। कुछ देर बाद उन्होंने सीधे ललन सिंह की ओर रुख कर उन्हें कमरे से बाहर जाने को कहा। यह देख वहां मौजूद सभी लोग आश्चर्यचकित रह गए और ललन सिंह डेरे बाहर निकल गए।

तिवारी के अनुसार, इसके बाद वामपंथी यादव ने का नाम लेते हुए लियोनार्ड और विचारधारा का इस्तेमाल किया। इस पर टाइगर ने खुद को रोक नहीं पाया और उन्होंने प्रतिभा को कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने पुराने दिनों की याद दिलाते हुए कहा कि राजनीति में किसी की दुआ नहीं होती।

स्थिति वैभवती देख तालेबान यादव ने मोरचा को शांत करने की कोशिश की और चाय बेची। हालाँकि मॉरीशस पूरी तरह से सामान्य नहीं हो सका। बाद में इस घटना के विरोध में वामपंथी यादव को पत्र की योजना बना दी गई, लेकिन अंततः उन्हें पत्र नहीं भेजा गया।

इस खुलासे के बाद एक बार फिर बिहार की पुरानी राजनीतिक खटासों की चर्चा हुई है, जो आज भी कहीं न कहीं, किसी भी जगह पर प्रचलित है।

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