बिहार सरकार भले ही बेहतर शिक्षा व्यवस्था का दावा करती हो, लेकिन जिले के बैंक मार्केट में स्थित सरकारी मध्य विद्यालय बिककोपुर की स्थिति इन छात्रों की हकीकत सामने लाती है। इस स्कूल को बने करीब 32 साल हो गए हैं, लेकिन आज तक यहां आने-जाने के लिए कोई पक्का रास्ता नहीं मिल पाया है। बच्चे और शिक्षक साकेतिक की पगडंडियों के  सहारे किसी तरह  स्कूल पहुंचते हैं अनहोनी पर्वत और जंगल से घिरा हुआ है, जहां बिकोपुर और परसाचुआ जैसे दो बड़े क्षेत्र की कुल आबादी 4000 से 5000 के बीच है। इसके बावजूद इस स्कूल तक सैकड़ों बच्चों के लिए  बने रहना आज भी एक बड़ी चुनौती है। छात्रों को रोजमर्रा की जिंदगी से एक किलोमीटर तक की दूरी तय करनी पड़ती है।

बारिश के मौसम में हालात और भी खराब हो जाते हैं। विविधता और फ़्रैनल के कारण बच्चे में कई बार  गिरकर घायल जाती  है, जिससे उनकी पढ़ाई भी प्रभावित होती है। छात्रों का कहना है कि काफी समय से यह समस्या बनी हुई है, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं निकला है।

स्कूल में लगभग 300 बच्चों का नामांकन है, जिनमें 200 से अधिक नियमित रूप से आते हैं। लेकिन यहां न तो पर्याप्त भवन है, न ही बेंच-डेस्क और न ही पीने के पानी की सुविधा। गर्मी के दिनों में बच्चों को पस्सियत तक में परेशानी होती है।

समस्या ख़त्म नहीं हुई। आठवीं के बाद आगे की पढ़ाई के लिए निकटतम में कोई विद्यालय नहीं है। छात्रों के लिए 10 से 12 किलोमीटर दूर परसावां द्वीप है, जहां पहुंचने के लिए जंगल के रास्ते परसावन द्वीप स्थित है। विशेष रूप से लड़कियों के लिए इसे छोड़ना असुरक्षित माना जाता है, क्योंकि अधिकांश आठवीं के बाद पढ़ाई छोड़ देती हैं और कम उम्र में उनकी शादी कर दी जाती है।

स्थानीय लोगों और स्कूल प्रशासन ने कई बार सड़क निर्माण के लिए आवेदन दिया, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। यह स्कूल आज भी सौंदर्य प्रसाधनों के अभाव में संघर्ष कर रहा है।

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