तेज़ बारिश, तूफ़ान और ओलावृष्टि ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया है। जिले के कई खंडों में खेती और तैयार फसलें बुरी तरह प्रभावित हुई हैं, जिससे किसानों पर गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।

मुशहरी खंड में लीची की खेती को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है। इस समय लीची में मंज़र आना और परान का महत्वपूर्ण समय होता है, लेकिन लगातार बारिश ने इस प्रक्रिया को बाधित कर दिया है। स्थानीय किसान राय के अनुसार, बारिश के कारण मंजर ढूंढ रहे हैं, जिससे इस बार उत्पादन में भारी गिरावट का खतरा है। ऐसे में इस नुकसान ने किसानों की चिंता और बढ़ा दी है।

वहीं कांटी प्लांट में आलू की फसल पर भी मौसम की मार पड़ी है। आलू की खुदाई का अंतिम चरण चल रहा था, लेकिन अचानक हुई बारिश से पानी भर गया। किसान इंद्रजीत की रिपोर्ट में कहा गया है कि पानी की समीक्षा से आलू के टुकड़े लगे हुए हैं, जिससे पूरी तरह से बर्बाद हो गया है।

कटरा खंड के खंगूरा क्षेत्र में स्थितियाँ और भी गंभीर हैं। यहां तेज तूफान और ओलावृष्टि ने सैकड़ों सैकड़े में लगी वस्तुएं और मसूर की फसल को पूरी तरह से नष्ट कर दिया है। मूल में फसलें जमीन पर बिछड़ गई हैं, जिससे कटाई भी मुश्किल हो गई है। किसान ऋषि चौधरी ने बताया कि 6 एकड़ में फैली खेती पूरी तरह से बर्बाद हो गई है और अब कर्ज चुकाने की चिंता सता रही है।

अन्य किसानों की स्थिति भी कम गंभीर नहीं है। राम राय की 5 शानदार तस्वीरें टूट गईं, जिससे उनकी बेटी की शादी की योजना प्रभावित हुई। वहीं सुनील चौधरी ने 50 हजार रुपये का कर्ज लेकर खेती की थी, जो अब डूबता नजर आ रहा है।

लगातार नुकसान से किसानों में मंदी का माहौल है। उन्होंने प्रशासन से जल्द ही कम्युनिस्ट कम्युनिस्ट पार्टी की मांग की है। अब देखिए क्या सरकार इस आपदा में किसानों को कितनी राहत दे सकती है।

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