सामुहिक बिहार के सामुहिक जिलों में शनिवार को आए तेज तूफान-तूफान और हेवी रेन ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया। जिले के कई जिलों में करीब 200 से अधिक क्षेत्र में फसलें पूरी तरह से नष्ट हो गईं। इस आपदा में सबसे ज्यादा नुकसान मक्का की फसल को हुआ है, जबकि अन्य फसलें, मसूर और चना जैसी अन्य फसलें भी बुरी तरह प्रभावित हुई हैं।

बताया जा रहा है कि पहले फसल कटाई से ठीक था और इस प्राकृतिक आपदा ने किसानों की महीनों की मेहनत पलभर में बर्बाद कर दी। तेज गति से चलने वाली नौकाएं और मूसलाधार बारिश के कारण हिस्सेदारी में हिस्सेदारी पर जमीन खराब हो गई। किसान अब खुद को पूरी तरह से तरह-तरह की राजनीति महसूस कर रहे हैं, क्योंकि उनका सारा विवरण इसी तरह सफल पर टिकी हुई थी।

स्थानीय किसान बमबम यादव ने अपना दर्द बयां करते हुए कहा कि खेती सिर्फ कमाई का जरिया नहीं, बल्कि परिवार का भरण-पोषण और बच्चों के भविष्य का आधार है। उन्होंने बताया कि उन्होंने खेती के लिए कर्ज लिया था, लेकिन अब फसल खराब होने के कारण कर्ज चुकाना और भी मुश्किल हो गया है।

वहीं भंडारी कुमार, रवि गुप्ता, विशाल यादव, विलास यादव, श्रीराम सिंह, आजाद सिंह सहित तारामंडल के किसानों ने बताया कि तूफान-तूफान में लगभग 200 के दशक में लगी मक्का की फसल पूरी तरह से बर्बाद हो गई है। किसानों का कहना है कि पहले फसल की स्थिति अच्छी थी, लेकिन इस बेमौसम आपदा ने सब कुछ मंदी कर दिया।

रहस्य है कि पिछले 10 दिनों में दूसरी बार जब तूफान-तूफान और बारिश से किसानों को भारी नुकसान हुआ है। लगातार हो रहे नुकसान से किसान गंभीर आर्थिक संकट में फंस गए हैं और अब अगली फसल के लिए भी सहायता की कमी महसूस कर रहे हैं।

प्रभावित किसानों ने जिला प्रशासन और राज्य सरकार से मांग की है कि जल्द से जल्द प्रभावित क्षेत्र का सर्वे किया जाए और वैज्ञानिक दिया जाए, ताकि वे इस कठिन समय से प्रभावित हो सकें।

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