बिहार के समुद्र तट पर स्थित सफियाबाद सब्जी मंडी, जो हर साल करोड़ों रुपये का राजस्व अर्जित करती है, आज खुद ही सामी का शिकार है। एफ सी सी कॉम्प्लेक्स में बनी इस मंडी में रोज़ सैकड़ों किसान, आढ़ती और किले हैं, लेकिन उनमें से प्रत्येक का अस्तित्व बना हुआ है।

मंडी में प्रवेश करते समय ही व्यापारियों का अंबार नजर आता है। चारो ओर के जंगल, पादप और राक्षसी का ज्वालामुखी है। इन हालातों के बीच सब्जी विक्रेता अपने कारखाने को मजबूर कर रहे हैं। साफ-सफाई की कोई ठोस व्यवस्था नहीं है, जिससे लोगों को काफी परेशानी होती है।

स्थिति को और ख़राब बना रहे हैं लावारिस जानवर, जो दिन-रात मंडी में रहते हैं। ये जानवर न केवल मवेशी फैलाते हैं, बल्कि कुल संख्या को नुकसान पहुंचाते हैं और आर्थिक नुकसान भी पहुंचाते हैं। इन समस्याओं का भी सामना करना पड़ता है।

किसानों और किसानों के लिए यह मंडी किसी भी संघर्ष से कम नहीं है। यहां न पीने के पानी की व्यवस्था है, न शौचालय, न बैठने या आराम करने के लिए साफ-सुथरी जगह। सुरक्षा के अभाव में चोरी की घटनाएं भी सामने आती रहती हैं। प्लास्टिक के खराब होने के कारण ट्रैक्टर से लेडे वाहन आए दिन बर्बाद हो जाते हैं, जिससे पेड़-पौधों को नुकसान पहुंचता है।

ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कई बार नगर निगम और प्रशासन से शिकायत की, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। तीन साल पहले मार्केट मार्केट ने समय-समय पर भुगतान का वादा किया था, जो आज तक पूरा नहीं हुआ।

इधर, नगर आयुक्त ने विश्वास जताया कि मंडी के विकास एवं सफाई व्यवस्था में शीघ्र सुधार होगा।

लोहियाबाद, सफियाबाद सब्जी मंडी व्यवस्था की एक कड़ीवी तस्वीर पेश कर रही है, जहां मेहनतकश किसान और व्यापारी रोजमर्रा की मुश्किलों के बीच काम करने को मजबूर हैं। अब देखिए प्रशासन के वादे कब बिगड़ गए हैं।

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