गैसों की खेती के सामने प्लास्टिक के बीच अब खाना बनाने का एक सस्ता और सस्ता विकल्प आया है। झारखंड की राजधानी में तैयार किया गया खास ‘ड्रैगन चूल्हा’ इन दिनों लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। कम पिज्जा में ज्यादा खाना पकाने की क्षमता और कम पिज्जा में पैदा होने वाली तकनीक इसकी सबसे बड़ी खासियत बन रही है।

यह खास चूल्हा में आयोजित किसान मेले में लोगों का ध्यान खींच रहा है। यूनिवर्सिटी की टेक्निकल टीम ने इसे इस तरह से डिजाइन किया है कि कम लकड़ी या केजेल में ज्यादा खाना प्याज जा सके। कीमत करीब 1500 रुपये तक शेयर की गई है, जिससे यह आम लोगों के लिए भी आसानी से उपलब्ध हो सकता है।

यूनिवर्सिटी के स्टाफ सदस्य शशांक के मुताबिक, इस चूल्हे को लकड़ी और क्लास रूम से उपलब्ध कराया जा सकता है। इसकी पुख्ता जानकारी है कि इसमें सिर्फ चार लकड़ियों की मदद से करीब 50 लोगों का खाना बनाया जा सकता है। चूल्हे के अंदर लकड़ी डालने के लिए अलग-अलग जगह बनाई गई है, जिससे चूल्हे का पूरा इस्तेमाल हो सके और बेकार न हो।

इस चूल्हे की एक और खासियत 360 डिग्री हीट सिस्टम है। चूल्हे के अंदर कोयला रखने के लिए भी एक अलग स्थान दिया गया है और ऊपर एक खास स्टैंड लगाया गया है, जिससे चारों ओर समानता मिलती है। आम चूल्हों में अक्सर एक ही जगह आ जाती है, जिससे खाना जलने की समस्या हो जाती है। लेकिन इस तकनीक की वजह से खाना समान रूप से पक्का है।

महिलाओं की सेहत पर ध्यान देते हुए इस चूल्हे को गुलाबी रंग दिया गया है और इसे पूरी तरह स्टील से कवर किया गया है। इसका गोल डिजाइन काफी हद तक कम करता है, जिससे आंखें और फेफड़े कम दिखते हैं। साथ ही स्टील कवरिंग के कारण हाथ टूटने या किसी अन्य दुर्घटना की संभावना भी कम हो जाती है।

कम कीमत, कम जलवा और ज्यादा उपयोगिता के कारण ‘कैप्चा चुल्हा’ ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के लिए एक सस्ता और उपयोगी विकल्प सामने आ रहा है।

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