शिवहर: रसोई गैस (एलपीजी) की खपत और समय पर गैस नहीं मिलने की समस्या ने शिवहर के ग्रामीण इलाकों में लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। फ़ोर्स और गैस की आपूर्ति आपूर्ति के कारण कई परिवार एक बार पुराने चूल्हे की आग को जलाने के लिए मजबूर हो गए हैं। कश्मीर में अब महिलाएं गोबर के उपले और सूखी लकड़ियाँ से खाना बनाने लगी हैं।

धर्मपुर वार्ड-12 में रहने वाली मीरा देवी का वर्णन है कि इस दौर में घर चलाना बेहद मुश्किल हो गया है। उनके पति राम श्रीष्ठ ठाकुर किसान हैं और पूरे परिवार की खेती की दुकान पर ही प्रतिबंध है। मीरा देवी के तीन पुत्र हैं और घर की सभी जिम्मेदारियाँ समान रूप से सीमित फिल्मों में निभाई जाती हैं। उनका कहना है कि अब गैस सिलेंडर भरवाना उनके घरेलू बजट से बाहर हो रहा है।

मीरा देवी का कहना है कि गैस गोदाम की कीमत लगभग दो से अधिक हजार रुपये तक लग रही है। ऐसे में उन्हें मजबूरन मवेशी गोबर के उपले और चिपरी बनाकर चूल्हा जलाना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि उनकी पत्नी लगातार दो दिनों से गैस एजेंसी के चक्कर लगा रही हैं, लेकिन अब तक उन्हें कोई भुगतान नहीं मिला है।

वहीं हंसा देवी का कहना है कि पहले सीमित उद्योगों में परिवार चलाना मुश्किल था, लेकिन गैस के सीमित उद्योगों ने तनाव और बढ़ा दिया है। उनके शिवपति नाथ सहनी किसान हैं और उनके दो बेटे पढ़ाई कर रहे हैं। हंसा देवी का कहना है कि अब मजबूरी में फिर से गोबर के उपले बनाकर खाना पकाना पड़ रहा है।

इस गांव की कहानियां पहले और अब के समय में बहुत प्रचलित हैं। उनके परिवार में पाँच सदस्य और बस्तियाँ हैं जिनका घरेलू बजट पूरी तरह से बना हुआ है। उनका कहना है कि “आमदनी अठन्नी और खर्चा रुपया” हो गया है।

ग्रामीण महिलाओं की मांग है कि सरकार गैस की कमी करे और इसकी नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करे। उनका कहना है कि अगर जल्द ही समाधान नहीं हुआ तो ग्रामीण इलाकों में चूल्हा और उपलों का दौर स्थायी रूप से वापस आ सकता है।

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