बिहार के बेतिया से एक बाघिन के मौत की खबर सामने आई है, जहां वाल्मिकी टाइगर रिजर्व से भटककर रैयशी इलाके में एक बाघिन की रेग्युअल कॉलोनी में मौत हो गई। गौनाहा के मंगुराहा वन क्षेत्र के अंतर्गत पंडई नदी के किनारे इस बाघिन का शव पूरे इलाके में पाया जाता है।

जानकारी के अनुसार, यह करीब साल की बाघिन थी, जो पिछले एक हफ्ते से जंगल से भटककर सिसई और मनीटोला के बीच देखने जा रही थी। क्रांति और किसानों ने उसे कई बार देखा, जिस इलाके में डर और विद्रोहियों का दमन हो गया था। वन विभाग द्वारा पहले ही स्थिति पर नजर रखी जा रही थी और लगातार निगरानी की जा रही थी।

मंगलवार को बाघिन केफिनाइल में वन विभाग ने शोकसभा शुरू की। विशेष टीम की स्थापना की गई और डूबने के रास्ते उसकी यात्रा पर नज़र रखी जा रही थी। इसी दौरान दो दिनों के बाद उनका बुज़ुर्ग पांडे नदी के पास मिला। जब टीम में शामिल हुए तो उन्होंने देखा कि बाघिन का शव नदी में तैर रहा है, जिसे देखकर सभी स्तब्ध रह गए।

आरंभिक जांच में राक्षसी राक्षस जा रहा है कि बाघिन अपने परिवार से बिछड़ गया था और भोजन की तलाश में रिसायशी इलाके तक आ गया था। पर्याप्त भोजन न मिलने के कारण वह चली गई और अंततः उसकी मृत्यु हो गई। वन फर्मा के अनुसार, उसका शरीर अत्यधिक दुबला और टुकड़ों का ढाँचा बन गया था, जिससे भूख से मौत की आशंका बनी हुई है।

वन विभाग के अधिकारी गौरव ओझा ने बताया कि शव को व्यवसाय में ले जाने के लिए भेजा गया था और विशेषज्ञ की टीम हर मानकों की जांच कर रही है।

इस घटना में एक बार फिर से स्थल संरक्षण व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न दिए गए हैं। आख़िर क्यों एक बाघिन जंगल से छुट्टी लेकर रिहाइशी इलाके में आ गया और उसे किस समय शहर में रहने दिया गया—ये सवाल अब चर्चा का विषय बन गए हैं।

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