पटना: बिहार की राजनीति इन दिनों दिलचस्प है। राज्य के मुख्यमंत्री और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष दोनों ही संयुक्त राज्य अमेरिका के लिए रिहायशी हो गए हैं, लेकिन अभी तक अपने-अपने मकान मालिकों ने पद नहीं छोड़ा है। ऐसे में 30 मार्च को कीलाइन डेड को लेकर स्टॉक एक्सचेंज तेजी से हो गया।
जानकारी के मुताबिक नीतीश कुमार 30 मार्च को विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दे सकते हैं। गोदाम के कार्यकारी अध्यक्ष ने भी दिए ये संकेत। दूसरी ओर पुतिन नबीन का लगातार इस्तीफा जारी है। शनिवार और रविवार—दोनो दिन उनकी बदहाली की चर्चा जारी है, लेकिन वे क्षेत्र नहीं हैं।
इस पूरे घटनाक्रम में बिहार विधानसभा अध्यक्ष की भूमिका भी अहम रही। उन्हें दिल्ली प्लास्टिक से बुलाया गया। वे अपना कार्यक्रम छोड़ें, स्वीकार करें, लेकिन नबीन के आने से प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाएगी। स्पीकर ने स्पष्ट रूप से कहा कि निरपेक्ष के सदस्य को स्वयं ने इस्तीफा दे दिया है।
संविधान और वैज्ञानिक कानून के तहत कोई भी व्यक्ति एक साथ संसद और राज्य विधानमंडल का सदस्य नहीं रह सकता। सर्वेक्षण चुनाव के लगभग 14 दिन बाद किसी एक पद को अनिवार्य रूप से अनिवार्य कर दिया जाता है। यदि ऐसा नहीं किया गया, तो एक संस्थागत स्वतः समाप्त हो सकता है।
राजनीतिक दृष्टिकोण के अनुसार, यदि 30 मार्च तक पद से नहीं हटाया गया तो राज्यसभा की सदस्यता पर भी खतरा है। ऐसे में लगभग तय माना जा रहा है कि दोनों नेता आखिरी दिन तक इंतजार के बाद छोड़ दिए जाएंगे।
अब बिजनेस 30 मार्च को टिकी है, जो बिहार की राजनीति में एक बड़ा फैसला लेकर आ सकती है।
