पटना से एक बड़ी आर्थिक खबर सामने आई है। पटना में वाणिज्यकर विभाग ने वित्तीय वर्ष 2025-26 का लेखा-जोखा जारी करते हुए बताया कि बिहार ने कर संग्रह के मामले में देशभर में चौथा स्थान हासिल कर लिया है। इस उपलब्धि की जानकारी राज्य के वित्त मंत्री और विभागीय अधिकारियों ने दी।

वित्तीय वर्ष 2025-26 में बिहार ने जीएसटी, वैट और अन्य स्रोतों को मिलाकर कुल 43,324.79 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड राजस्व संग्रह किया है। यह पिछले वित्तीय वर्ष 2024-25 के 41,623.96 करोड़ रुपये की तुलना में 4.09 प्रतिशत अधिक है। खास बात यह है कि जीएसटी दरों में कमी के बावजूद राज्य ने बेहतर प्रदर्शन किया है, जो कर प्रबंधन की मजबूती को दर्शाता है।

वित्त मंत्री बिजेंद्र यादव के अनुसार, राज्य के कुल नकद संग्रह—जिसमें एसजीएसटी, सीजीएसटी, आईजीएसटी और उपकर शामिल हैं—में 10.60 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। उन्होंने बताया कि विकास दर के मामले में बिहार देश में के बाद दूसरे स्थान पर है, हालांकि ये आंकड़े अभी अनंतिम हैं।

जीएसटी संग्रह की बात करें तो मार्च 2026 में बिहार का प्रदर्शन बेहद प्रभावशाली रहा। मार्च 2025 की तुलना में 13 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर यह वृद्धि केवल 5 प्रतिशत रही। पूरे वर्ष में जीएसटी से 32,801 करोड़ रुपये जुटाए गए, जो पिछले वर्ष से 11.7 प्रतिशत अधिक है। हालांकि आईजीएसटी बैलेंस में समायोजन के बाद 724 करोड़ रुपये की कटौती हुई, जिससे अंतिम जीएसटी संग्रह 32,077.22 करोड़ रुपये रहा। इसके बावजूद 9.20 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जो राष्ट्रीय औसत 6 प्रतिशत से ज्यादा है।

वहीं गैर-जीएसटी मद में राज्य ने 11,247.57 करोड़ रुपये जुटाए। इसमें पेट्रोल पर वैट से 10,037.38 करोड़, बिजली शुल्क से 983.81 करोड़ और पेशा कर से 226.38 करोड़ रुपये शामिल हैं।

निबंधन विभाग ने भी शानदार प्रदर्शन करते हुए 8,250 करोड़ के लक्ष्य के मुकाबले 8,403.46 करोड़ रुपये का राजस्व हासिल किया, यानी लक्ष्य का 101.86 प्रतिशत। साथ ही, पिछले वर्ष की तुलना में 9.86 प्रतिशत की वृद्धि भी दर्ज की गई।

कुल मिलाकर, यह आंकड़े दिखाते हैं कि बिहार न केवल राजस्व संग्रह में आगे बढ़ रहा है, बल्कि मजबूत आर्थिक प्रबंधन की दिशा में भी तेजी से कदम बढ़ा रहा है।

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