पटना: बिहार के सरकारी स्कूलों में बच्चों को दिए जाने वाले स्कैलप-पकाए मिड-डे-मील को लेकर एक मुनाफाखोरी का मामला सामने आया है। जांच में कुछ केंद्रीकृत रसोई घरों से भेजे गए भोजन के दस्तावेजों में खतरनाक ई-कोलाई अवशेष पाए गए हैं। यह बच्चों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा माना जाता है। मामले के सामने आने के बाद शिक्षा विभाग के मध्याह्न भोजनालय ने इसे अलग से लेते हुए सभी स्कूलों को सख्त निर्देश जारी किए हैं।

यूक्रेनी, सरकारी स्कूलों में बच्चों को गर्म और ताजा भोजन उपलब्ध कराने के लिए कई अनूठे केंद्रों में रसोई की व्यवस्था की गई है। इन रसोईघरों में भोजन तैयार करने के लिए विभिन्न प्रकार के व्यंजन भेजे जाते हैं। हाल ही में रसोई घरों से भेजे गए भोजन के नमूने की जांच दिल्ली की संस्था इवोन फूड लैब प्राइवेट लिमिटेड से की गई। जांच में कुछ दस्तावेज़ों में ई-कोलाई उपकरणों की खोज की गई, जिसके बाद विभाग ने तुरंत उपकरणों के निर्देश दिए।

मध्याह्न भोजन के निदेशक विनायक मिश्र ने बताया कि भोजन की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए समय-समय पर स्कैनर से लेकर उनकी जांच की जाती है। इसी प्रक्रिया के दौरान यह मामला सामने आया। इसके बाद सभी अनुमोदित रसोईयों की नियमित निगरानी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है कि भोजन तैयार करना, भंडारण करना और प्रशिक्षण की प्रक्रिया में स्वतंत्रता का पालन करना शामिल है।

निर्देशों में कहा गया है कि भोजन बनाने वाले रसोइयों और रसोई कर्मचारियों को व्यक्तिगत स्वतंत्रता का विशेष ध्यान रखना होगा। खाना बनाने से पहले हाथ को अच्छी तरह से बनाए रखना, सिर को कोमकर रखना और ग्लव्स का इस्तेमाल करना जरूरी है। इसके अलावा भोजन बनाने और बनाने में उपयोग किए जाने वाले पोथरों की अच्छी तरह से सफाई भी अनिवार्य बताई गई है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ के अनुसार ई-कोलाई किराने की दुकान पर स्टॉक या स्टॉक में पानी का कारण स्टॉक है। इससे बच्चों में पेट दर्द, दस्त, उल्टी और श्वसन संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। विशेषज्ञ का कहना है कि भोजन को अच्छी तरह पकाना, साफ पानी का उपयोग करना और भोजन को ज्यादा देर तक न रखना बेहद जरूरी है।

ईसाई धर्म के अनुसार पका हुआ भोजन आम तौर पर तीन घंटे तक सुरक्षित रहता है। इसके बाद घटक घटक मैथ्यूने का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए मिड-डे-मील को एक ही समय में छोड़े गए बच्चों को गर्मागर्म फर्म बनाना सबसे सुरक्षित माना जाता है।

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