बक्सर से स्वास्थ्य व्यवस्था की एक चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है, जहां सरकार के दावों की जमीनी हकीकत पूरी तरह उलट नजर आ रही है। सदर अस्पताल परिसर में बना 42 बेड का शिशु गहन चिकित्सा इकाई (PICU) आज तक शुरू नहीं हो सका है और अब यह इलाज का केंद्र बनने के बजाय असामाजिक तत्वों का अड्डा बन चुका है।

करीब 2.47 करोड़ रुपये की लागत से इस अत्याधुनिक अस्पताल का निर्माण 2023 में शुरू हुआ था, जो 2024 में पूरा हुआ और 2025 में स्वास्थ्य विभाग को सौंप दिया गया। लेकिन हैरानी की बात यह है कि आज तक इस अस्पताल का उद्घाटन तक नहीं हुआ। भवन के दरवाजों पर ताले लटके हैं और अंदर की हालत बदहाली बयां कर रही है।

अस्पताल परिसर में शराब की खाली बोतलें, नशे के इंजेक्शन, दवाइयों के रैपर और इस्तेमाल किए गए कंडोम बड़ी संख्या में पाए गए हैं। स्थानीय लोगों के मुताबिक शाम होते ही यहां असामाजिक तत्वों का जमावड़ा लग जाता है और यह जगह रंगरेलियों का अड्डा बन जाती है।

इतना ही नहीं, अस्पताल के चालू होने से पहले ही चोरों ने इसे निशाना बना लिया। यहां लगे एसी, महंगे उपकरण और फर्नीचर तक चोरी हो चुके हैं। शिकायत के बावजूद पुलिस की कार्रवाई भी सिर्फ औपचारिकता तक सीमित नजर आ रही है।

इस मामले पर स्वास्थ्य विभाग के एसीएमओ डॉ. बिनोद प्रताप सिंह का कहना है कि मैनपावर की कमी के कारण अस्पताल शुरू नहीं हो पाया है। डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की कमी सबसे बड़ी बाधा बताई जा रही है।

वहीं स्थानीय लोगों का आरोप है कि सरकार सिर्फ इमारतें खड़ी कर अपनी उपलब्धियां गिना रही है, जबकि जमीनी स्तर पर कोई व्यवस्था नहीं है। लोगों का कहना है कि जिस अस्पताल को बच्चों की जान बचाने के लिए बनाया गया था, वह आज खुद बदहाल सिस्टम का प्रतीक बन गया है।

अब सवाल यह उठता है कि क्या सिर्फ भवन बनाना ही पर्याप्त है, या उसे चालू कर सही स्वास्थ्य सेवाएं देना भी सरकार की जिम्मेदारी है?

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