बिहार के मधेपुरा में ठगी का एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जहां एक दंपति ने खुद को आईएएस अधिकारी बताकर एक ठेकेदार से 34.74 लाख रुपये ठग लिए। शातिर ठगों ने इतनी साजिश के साथ पूरा खेल रचा कि पीड़ित को लंबे समय तक शक तक नहीं हुआ, लेकिन एक छोटी सी गलती ने उनके पूरे फर्जीवाड़े का पर्दाफाश कर दिया।

पीड़ित ठेकेदार नारायण यादव ने बताया कि साल 2025 में सिंहेश्वर में आयोजित एक सत्संग कार्यक्रम के दौरान उनकी मुलाकात एक वीआईपी गाड़ी में सवार महिला से हुई। गाड़ी पर ‘प्रधान सचिव सह मिशन निदेशक, सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार’ का बोर्ड लगा था। महिला ने खुद को आईएएस अधिकारी एन विजयलक्ष्मी बताया, जबकि उसका पति सन्नी कुमार राय बॉडीगार्ड की भूमिका निभा रहा था। दोनों ने सरकारी ठेके दिलाने का भरोसा देकर नारायण को अपने जाल में फंसा लिया।

विश्वास बढ़ाने के लिए उन्हें पटना के कैबिनेट सचिवालय के केबिन में बुलाया गया, जहां ठेके की डील हुई। इसके बाद करीब दो महीने तक अलग-अलग बहानों से पैसे की मांग होती रही और नारायण बिना शक किए रकम ट्रांसफर करते रहे।

जब तय समय पर ठेका नहीं मिला, तो नारायण को शक हुआ। उन्होंने पैसे वापस मांगे तो ठगों ने खुद को देवघर में बताया। लाइव दर्शन की मांग पर उन्होंने फोटो भेजी, जिसमें तथाकथित बॉडीगार्ड महिला के कंधे पर हाथ रखे दिखा। यही तस्वीर नारायण के लिए शक की वजह बनी।

सच्चाई जानने के लिए नारायण पटना पहुंचे और असली अधिकारियों से मुलाकात की, जहां उन्हें पता चला कि वे ठगी का शिकार हो चुके हैं। इसके बाद उन्होंने थाने में शिकायत दर्ज कराई।

पुलिस ने कार्रवाई करते हुए दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। उनके पास से एक कार और आईफोन बरामद हुआ है। जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी पहले भी कई ठगी मामलों में शामिल रह चुके हैं। फिलहाल पुलिस पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है।

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