पटना स्थित मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल(PMCH) सिर्फ एक बड़ा अस्पताल ही नहीं, बल्कि इतिहास और आस्था का केंद्र भी है। 1925 में स्थापित इस संस्थान के परिसर में आज भी ईरान के राजकुमार मिर्जा मुराद सफवी की मजार मौजूद है, जहां लोग श्रद्धा से माथा टेकते हैं।

मिर्जा मुराद सफवी मुगल काल के प्रभावशाली परिवार से जुड़े थे। उनके पिता मिर्जा रुस्तम सफवी, जहांगीर के शासनकाल में बिहार के सूबेदार थे। खुद मुराद सफवी ने भी जहांगीर और शाहजहां  के दरबार में अहम भूमिका निभाई और उन्हें “इल्तिफ़ात ख़ान” की उपाधि मिली। मनसबदारी व्यवस्था में उन्हें 2000 का मनसब और 800 घुड़सवारों की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।

इतनी शक्ति और प्रतिष्ठा के बावजूद, मिर्जा मुराद ने अचानक राजशाही छोड़ दी और फकीरी का रास्ता अपना लिया। कहा जाता है कि वे 24 घंटे इबादत में लीन रहते थे और लोगों का मानना है कि उनके स्पर्श से बीमारियां तक ठीक हो जाती थीं। यही वजह है कि उनकी मजार आज भी लोगों की आस्था का केंद्र बनी हुई है।

स्थानीय लोगों के अनुसार, कई चमत्कारी घटनाएं इस मजार से जुड़ी हैं। एक ठेकेदार जी.एन. वर्मा ने अपने बीमार बच्चे के ठीक होने के बाद इस मजार को भव्य रूप दिया। वहीं, अशोक महाजन और मुकेश कुमार जैसे कई लोग दावा करते हैं कि यहां दुआ मांगने से उनके परिजनों की जान बची।

इतिहासकारों के मुताबिक, जिस जगह आज PMCH है, वहीं कभी मिर्जा मुराद की हवेली थी। उनके निधन के बाद उन्हें यहीं दफनाया गया और बाद में यह जमीन अस्पताल के लिए इस्तेमाल की गई। 19वीं सदी में ब्रिटिश शासन के दौरान यहां मेडिकल संस्थान की स्थापना हुई।

मिर्जा मुराद सफवी की कहानी सिर्फ इतिहास नहीं, बल्कि आस्था, त्याग और भारत-ईरान के गहरे रिश्तों का प्रतीक भी है।

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