पटना से बड़ी खबर सामने आई है, जहां पटना हाईकोर्ट ने आरा सिविल कोर्ट परिसर में बम विस्फोट मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने मुख्य बुनियादी ढांचे लंबू को शर्मा की मृत्युदंड से राहत देते हुए फांसी की सजा खत्म कर दी है। हालाँकि, जेल से बहरे मामले में लम्बू शर्मा और नेपोलियन उपाध्याय को सजा सुनाई गई है।

हाई कोर्ट ने इस मामले में एक और अहम फैसला सुनाते हुए सात अन्य पादरियों को भी बड़ी राहत दी है। चाँद मियाँ, नईम मियाँ, रिंकू यादव, रामूम सिंह, श्याम विनय शर्मा और अन्शु कुमार समेत अन्य को समलैंगिकों की सज़ा से बुरी तरह से नवाजा गया है। यह मुख्य निर्णय न्यायाधीश के नेतृत्व वाली खण्डपीठ ने जारी किया।

दरअसल, इस मामले की सुनवाई पूरी होने के बाद 12 फरवरी 2026 को कोर्ट ने फैसला सुनाया था, जिस पर अब फैसला सुनाया गया है। सुनवाई के दौरान अदालत ने सभी बैंटफटा क्लास को ऑनलाइन पेश करने का निर्देश दिया था और उनके लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से वकील भी उपलब्ध कराया गया था।

मामला 23 जनवरी 2015 का है, जब आरा सिविल कोर्ट परिसर में एक महिला आत्मघाती हमलावर ने खुद को विस्फोट कर उड़ा लिया था। इस अनोखे में तीन लोगों की मौत हो गई और कई लोग घायल हो गए। घटना का मकसद अपराधी लम्बू शर्मा को भगाना था, जिसमें वह सफल भी हुआ था।

बाद में वकील अदालत ने 21 अगस्त 2019 को लम्बू शर्मा को फाँसी की सजा सुनाई, जबकि अन्य सात आरोपियों को उम्रकैद की सजा दी गई। साथ ही सभी पर आर्थिक जुर्माना भी लगाया गया था। इसी को चुनौती देते हुए चार ने पटना हाईकोर्ट में अपील की थी।

अब उच्च न्यायालय के इस फैसले में मामले की दिशा बदल दी गई है, जिसमें कुछ गरीबों को राहत मिली है, तो कुछ की सजा तय की गई है।

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