पटना जिले के भगवानगंज थाना क्षेत्र के खैनीया गांव में सड़क दुर्घटना के बाद अचानक दुर्घटनाएं हो गईं। 15 मार्च की शाम करीब 5 बजे एक भरोसेमंद दोस्त की टक्कर से दो मासूम बच्चों की मौत हो गई। इस घटना के बाद पूरे गांव में अफरा-तफरी मच गई और आक्रोश में आकर सड़क पर शव रैली का विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया।

प्रदर्शन के दौरान आशिक ने मुख्य सड़क को जाम कर दिया, जिससे यातायात पूरी तरह बाधित हो गया। घटना की सूचना पुलिस के निशाने पर है और लोगों पर हमला करने की कोशिश की गई है, लेकिन स्थिति और खुलासा किया गया है। टीम भीड़ ने पुलिस पर गणतंत्र दिवस की शुरुआत की।

इस बदलाव में पुलिस के तीन जवान घायल हो गए। पिशाचों में पर्यवेक्षक पर्यवेक्षक नवनीत कुमार, सैनिक पर्यवेक्षक पासपोर्ट और गृह संरक्षक डेमोक्रेट कुमार शामिल हैं। भीड़ के हमलों में पुलिस वाहन भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए।

घटना के बाद वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को बुलाया गया। देर रात काफी संकट और तस्वीरें-बुझाने की स्थिति पर नियंत्रण कर लिया गया। इसके बाद पुलिस ने भगवानगंज की दुकान पर सुजीत कुमार के बयान दर्ज कर सख्त कार्रवाई की।

इस मामले में खानिया के 13 लोगों को शामिल किया गया है, जिसमें अलेक्जेंडर यादव, भोला नी राहुल, आदिल, मिथिल कुमारेश, सचिन कुमार, बिन्ना कुमार, रणधीर कुमार और किशोर कुमार समेत अन्य शामिल हैं। इसके अलावा 50 से 60 अज्ञात लोगों के खिलाफ भी मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने एक नाबालिग अलेक्जेंडर यादव को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि अन्य के अपराधियों को कॉन्स्टॉल जारी किया गया है।

इधर, पुतले ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि दो बच्चों की मौत के बाद भीड़ ने स्वतःस्फूर्त विरोध किया था, ऐसे में इस तरह का मामला दर्ज नहीं करना है।

पूर्वोत्तर क्षेत्र में स्थिति सामान्य बनी हुई है, लेकिन पुलिस पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है और डकैती की गुंडागर्दी के प्रयास जारी हैं।

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