पटना में एक अनोखी तस्वीर देखने को मिली, जहां बिहार सरकार के ग्रामीण कार्य मंत्री अशोक चौधरी ने आज से अपनी नई भूमिका की शुरुआत करते हुए प्रोफेसर के तौर पर क्लास ली। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के करीबी माने जाने वाले अशोक चौधरी पटना के एएन कॉलेज पहुंचे और छात्रों को पॉलिटिकल साइंस पढ़ाया। अपनी इस नई जिम्मेदारी को लेकर वे उत्साहित भी दिखे और थोड़े नर्वस भी।

क्लास लेने के दौरान उन्होंने कहा कि बहुत कम लोग होंगे जो मंत्री रहते हुए प्रोफेसर की भूमिका निभाना चाहेंगे। लेकिन उनके अंदर हमेशा से पढ़ाने की जिज्ञासा रही है, जो आज पूरी हो रही है। उन्होंने कहा कि 1991 में उन्होंने खुद पॉलिटिकल साइंस की पढ़ाई की थी और अब 2026 में उसी विषय को पढ़ाने का मौका मिला है, जो उनके लिए खास अनुभव है।

अशोक चौधरी ने यह भी स्वीकार किया कि विधानसभा में सवालों का जवाब देना जितना आसान होता है, क्लास में छात्रों के सवालों का जवाब देना उससे कहीं ज्यादा चुनौतीपूर्ण है। उन्होंने कहा कि छात्रों के सवाल सीधे और गहराई वाले होते हैं, जिनके लिए बेहतर तैयारी जरूरी है। इसी को ध्यान में रखते हुए उन्होंने सिलेबस की भी जानकारी ली है।

हालांकि, उनकी यह नियुक्ति शुरू से ही विवादों में रही है। असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर बहाली को लेकर विपक्ष ने कई सवाल उठाए थे। जन सुराज के प्रशांत किशोर समेत कई नेताओं ने चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े किए थे। बावजूद इसके, पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय में उनका चयन हुआ और अब उन्होंने पढ़ाना भी शुरू कर दिया है।

58 वर्षीय अशोक चौधरी बिहार की राजनीति का जाना-पहचाना चेहरा हैं। वह जनता दल यूनाइटेड के राष्ट्रीय महासचिव भी हैं और पहले कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं। 2015 से 2017 के बीच वे शिक्षा मंत्री भी रह चुके हैं। अब मंत्री के साथ-साथ प्रोफेसर की भूमिका में उनकी नई पारी चर्चा में है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *