पटना में बिहार के 114वें स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित तीन दिव्य सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शुरुआत बेहद रंगारंग अंदाज में हुई। पहले दिन मशहूर बॉलीवुड सिंगर सोना महापात्रा ने अपने दिग्गजों से समां बांध दिया। रविवार शाम जैसे ही उन्होंने मंच पर कब्जा किया, पूरा गांधी मैदान तालियां और उत्साह से गूंज उठाया।
शाम 7:30 बजे यह संगीत कार्यक्रम करीब दो घंटे तक चला। सोना महापात्रा ने अपने सिग्नेचर सॉन्ग “रुपइया” से प्रोग्राम की शुरुआत की और “जिया लागे ना” जैसे लोकप्रिय कलाकारों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। जैसे-जैसे कार्यक्रम आगे बढ़ा, दर्शकों का उत्साह भी चरम पर पहुंच गया।
कार्यक्रम के दौरान उन्होंने भोजपुरी में संवाद कर दर्शकों से खास बातचीत की। उन्होंने कहा कि करीब 10 साल पहले पटना उन्हें यहां आया था, जिन लोगों से प्यार मिला, वही अपनापन इस बार भी महसूस हो रहा है।
सोना महापात्रा ने बिहार की संस्कृति को मंच पर जीवंत कर दिया। उन्होंने छठ पर्व को समर्पित गीत “उघे सूर्य देव, भईल भिनसरवा” गाकर पूरे समुद्र को भक्तिमय बना दिया। साथ ही उड़ीसा के लोकगीतों और मां दुर्गा के भक्ति आश्रमों के कलाकारों के कार्यक्रमों में सांस्कृतिक विविधता का रंग भी झलका।
उन्होंने सुबह का दौरा करने का अनुभव साझा करते हुए इसकी भव्यता की सराहना की। साथ ही उन्होंने बिहार की लोकसंस्कृति और योगदान की गौरवपूर्ण प्रशंसा की।
कार्यक्रम में “मेरे रश्के कमर”, “अंबरसरिया” और भोजपुरी गीत “रेलिया बैरन पिया को लिए जाए रे” जैसे दर्शकों पर दर्शक झूमते हैं। अंत में “लैला मैं लैला” के साथ ही उनका समापन हुआ।
कार्यक्रम के बाद शिक्षा मंत्री ने उन्हें सम्मानित किया। वहीं, समारोह के दूसरे दिन प्रसिद्ध गायक, शहीद भी शामिल होंगे।
