बिहार की राजधानी में ईद-उल-फितर के मौके पर हजारों नमाजियों ने बारिश के बीच सामूहिक नमाज अदा की। मौसम की उथल-पुथल के बावजूद लोगों का उत्साह कम नहीं हुआ और पूरे मैदान में इबादत का खास नजारा देखने को मिला।
हालाँकि इस बार एक बड़ा बदलाव देखने को मिला। पिछले 20 वर्षों से हर साल नीतीश कुमार इस समारोह में शामिल नहीं हो रहे हैं। उनकी गैरमौजूदगी चर्चा का विषय बनी रही और लोगों के बीच इसकी खूब चर्चा होती रही।
उनकी अनुपस्थिति में उनके बेटे ने कार्यक्रम में भाग लिया। वे गांधी मैदान के बीच कड़ी सुरक्षा व्यवस्था में शामिल थे, जहां आतंकवादियों के कई दिग्गज नेता भी शामिल थे। मंच पर मुस्लिम नेताओं ने निशांत कुमार का गमछा ओढ़ाकर स्वागत किया। इस दौरान उन्होंने बिहार और देशवासियों को ईद की मुबारकबाद दी और सभी के लिए अमन-चैन और खुशहाली की दुआ की।
गांधी मैदान के अलावा और भी कई ईदगाहों में बड़ी संख्या में लोगों ने नमाज अदा की। हर जगह सुरक्षा के चाक चौबंद किए गए थे और प्रशासन पर पूरी तरह से नजर रखी गई।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भले ही प्रशिक्षण में दाखिला नहीं लिया, लेकिन उन्होंने प्रदेश और देशवासियों की पहचान की पुष्टि की। अपने संदेश में उन्होंने कहा कि रमज़ान के पवित्र महीने में इबादत से समाज में शांति, समृद्धि और भाईचारा कायम रहा।
नमाज के दौरान इमाम ने लोगों को एक खास संदेश भी दिया। उन्होंने नमाजियों को अपने माता-पिता का सम्मान करने का संकल्प लिया और कहा कि बुजुर्गों के दिल दुखाने इबादत का महत्व कम हो जाता है।
सुरक्षा व्यवस्था की बात करें तो मसौढ़ी में कुल 39 जगहों पर पुलिस और मजिस्ट्रेट की व्यवस्था की गई थी। पूरे इलाके में चप्पे-चप्पे पर नजर रखी गई, जिससे कि स्वादिष्ट मसालों की तलाश की जा सके।
