उद्यमिता/मधुबनी/सुपौल: नेपाल में संसदीय चुनाव के बाद नई सरकार बनने की तैयारी के साथ ही भारत के लोकतंत्र में हलचल और चर्चा तेज हो गई है। विशेष रूप से बिहार के नेपाल से लेकर सबसे सुंदर शटर-पश्चिमी हिमाचल प्रदेश, पूर्वी रांची, मध्य प्रदेश, बिहार, सुपौल, अररिया और किशनगंज-के लोगों की नजर नेपाल की राजनीतिक स्थिति पर टिकी है। यहां के लोगों का मानना ​​है कि नेपाल में राजनीतिक बदलावों का सीधा असर क्षेत्र के सामाजिक, आर्थिक और व्यावसायिक रूप से प्रभावित होता है।

भारत और नेपाल के कारोबार पर आम तौर पर ‘रोटी-बेटी का रिश्ता’ कहा जाता है। यानी दोनों देशों के बीच सिर्फ राजनीतिक और व्यावसायिक संबंध ही नहीं, बल्कि पारिवारिक और सांस्कृतिक संबंध भी गहरे हैं। बिखराव में बड़ी संख्या में ऐसे परिवार हैं, जो अलग-अलग देशों से जुड़े हुए हैं।

बिहार के लोगों का कहना है कि नेपाल में सरकार तो कोई भी बन सकती है, लेकिन भारत-नेपाल के बीच संबंध कभी खत्म नहीं हो सकते। हालांकि नई सरकार बनने के बाद वास्तविक स्थिति का आकलन करने के लिए कुछ समय का इंतजार जरूरी होगा।

वरिष्ठ पत्रकार प्रो. विश्वनाथ ठाकुर का कहना है कि भारत और नेपाल के बीच सामाजिक बाज़ार के साथ-साथ व्यापारिक बाज़ार भी काफी मजबूत हैं। कई भारतीय व्यापारी नेपाल में बड़ा कारोबार कर रहे हैं, वहीं नेपाल के लोग भी भारत में कारोबार करते हैं। भारत सरकार के आंकड़ों के 2024 में भारत ने नेपाल से करीब 867 मिलियन डॉलर का निवेश किया, जबकि नेपाल ने 6.95 अरब डॉलर का निवेश किया।

बिहार के लिए नेपाल के सहयोग का एक बड़ा मुद्दा बाढ़ भी है। नेपाल के तराई क्षेत्र में होने वाली बारिश का पानी, बिहार में नदी, मधुमेह, बाढ़ की स्थिति पैदा हो गई है। ऐसे में मधुमेह नियंत्रण के लिए दोनों देशों के बीच सहयोग आवश्यक माना जाता है। जयनगर में बांध बनाने को भी इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

वहीं सुपौल और होटल के युवाओं का नेपाल में नई सरकार को लेकर उत्साह देखने को मिल रहा है। स्थानीय लोगों का मानना ​​है कि नए राजनीतिक नेतृत्व से विकास की कमी बढ़ेगी और दोनों देशों के बीच संबंध और मजबूत होंगे। साथ ही हाल में सुपौल के ललितग्राम से भीमनगर बॉर्डर तक नई रेल लाइन को मंजूरी मिलने से लेकर व्यापार को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

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