दरभंगा जिले के कुशेश्वरस्थान प्रखंड स्थित उच्च विद्यालय घरदौड़ से एक प्रेरणादायक कहानी सामने आई है, जिसने यह साबित कर दिया कि मजबूत इरादों के आगे किसी भी बाधा का कोई महत्व नहीं होता। यह कहानी है 100 प्रतिशत नेत्रहीन छात्र प्रशांत कुमार सिंह की, जिन्होंने अपनी कमजोरी को कभी अपनी पढ़ाई के रास्ते में नहीं आने दिया।
प्रशांत दोनों आंखों से नहीं देख सकते, लेकिन उन्होंने अपनी इस स्थिति को अपनी ताकत बना लिया। कठिन परिस्थितियों में भी उन्होंने लगातार मेहनत की और बिहार मैट्रिक परीक्षा में 395 अंक हासिल कर प्रथम श्रेणी से सफलता प्राप्त की। उनका यह परिणाम न सिर्फ उनके परिवार बल्कि पूरे समाज के लिए गर्व की बात है।
प्रशांत के पिता रंधीर कुमार सिंह ने बताया कि एक समय ऐसा था जब उन्होंने अपने बेटे के भविष्य की उम्मीद लगभग छोड़ दी थी, लेकिन प्रशांत की मेहनत और जिद ने उन्हें फिर से उम्मीद दे दी। उन्होंने कहा, “मेरे बेटे ने यह साबित कर दिया कि अगर हौसला हो तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं है।” वहीं उनकी मां ममता देवी, जो एक सरकारी शिक्षिका हैं, अपने बेटे की सफलता से बेहद खुश हैं और आगे भी उसका पूरा साथ देने की बात कहती हैं।
प्रशांत ने अपने परिणाम पर खुशी जताते हुए कहा कि वह और बेहतर कर सकते थे, लेकिन राइटर के कम अनुभव के कारण थोड़ा असर पड़ा। उन्होंने आगे भी पढ़ाई जारी रखने और ऐसा करियर चुनने की इच्छा जताई, जिससे वे अपने जैसे अन्य नेत्रहीन छात्रों के लिए प्रेरणा बन सकें।
चूंकि प्रशांत खुद लिख नहीं सकते थे, इसलिए परीक्षा के दौरान उन्हें एक राइटर की सहायता दी गई। आठवीं कक्षा के छात्र रामा कुमार पासवान ने उनकी मदद की और उनके बताए अनुसार उत्तर लिखे। रामा के इस सहयोग की भी हर तरफ सराहना हो रही है।
प्रशांत की यह कहानी बताती है कि कठिनाइयां चाहे कितनी भी बड़ी क्यों न हों, सच्ची मेहनत और आत्मविश्वास से हर मंजिल हासिल की जा सकती है।
