नालंदा जिले के सरमेरा प्रखंड के धनावांडीह उत्क्रमित मध्य विद्यालय में शिक्षकों की भारी कमी ने बच्चों की पढ़ाई को ठप कर दिया है। पहले यहां आठ शिक्षक थे, लेकिन पिछले डेढ़-दो साल में कुछ का तबादला हुआ और कुछ प्रमोशन के कारण चले गए। वर्तमान में सिर्फ तीन शिक्षक हैं, जिनमें से दो प्राइमरी कक्षाओं (1 से 5) के बच्चों को पढ़ा रहे हैं, जबकि कक्षा 6 से 8 के 61 छात्रों के लिए कोई शिक्षक नहीं है।
प्रधानाध्यापक सत्येन्द्र प्रसाद के अनुसार, “दो बार शिक्षक के लिए आवेदन किया, लेकिन अभी तक कोई परिणाम नहीं आया। बच्चों की पढ़ाई बाधित हो रही है।” इस बीच वार्षिक परीक्षाओं के बाद शिक्षक अरविंद कुमार छुट्टी पर हैं और आलोक सिंह ही बच्चों की पढ़ाई का बोझ संभाल रहे हैं। ऐसे में 172 बच्चों की शिक्षा अब सिर्फ एक-दो लोगों पर निर्भर है।
छात्रा नंदिनी ने बताया कि “बिना पढ़ाई के ही परीक्षा दी गई, केवल ट्यूशन में सीखा वही लिख पाए।” 8वीं की नव्या कुमारी और 7वीं की मनीषा सिंह अपने अभिभावकों के साथ जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचीं, लेकिन अधिकारियों ने मीटिंग के बहाने उन्हें मिलने नहीं दिया।
गांव के करीब 350 घरों में से अधिकांश गरीब परिवार हैं, जो सरकारी स्कूल पर ही निर्भर हैं। ई-रिक्शा चलाने वाले उदय सिंह कहते हैं कि उनकी बेटी अंग्रेजी और गणित में कमजोर हो रही है, लेकिन निजी स्कूल का खर्चा वह वहन नहीं कर सकते। रसोइया सुनैना देवी का कहना है कि रोजाना 80-100 बच्चे भोजन के लिए आते हैं, लेकिन पढ़ाई न होने से बच्चे मायूस हैं।
डीपीओ आनंद शंकर ने बताया कि वैकल्पिक इंतजाम किए जा रहे हैं। वहीं पूर्व प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी दिलीप कुमार ने कहा कि ऑनलाइन ट्रांसफर के कारण शिक्षक अपने नजदीकी विद्यालयों में चले गए हैं और अब पूरे मामले की जिम्मेदारी जिला शिक्षा पदाधिकारी की है।
इस गंभीर स्थिति के बीच बच्चों का भविष्य अंधेरे में है और सरकार से तत्काल शिक्षक तैनात करने की मांग उठ रही हैं
