बिहार के किसी भी शख्स से एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसने कुछ पलों के लिए हर की दुनिया की पड़ताल की थी। यह मामला उस वक्त का है जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपनी ‘समृद्धि यात्रा’ के तहत बिहारशरीफ राज्य में थे और अपने काफिला रोड मार्ग से गुजर रहे थे।

गुरुवार सुबह करीब 10:30 बजे पूरे इलाके में सुरक्षा के हालात खराब थे। सायरन बजाती ढोल, तेज धार वाले लोग-हर तरफ हलचल और जोश का मनोबल था। लेकिन इसी दौरान एक ऐसा क्षण आया, जिससे तूफान में अचानक विस्फोट हो गया।

जैसे ही मुख्यमंत्री का काफिला भैंसासुर देवी स्थान के पास पहुंचा, उसी समय एक छोटा बच्चा अचानक सड़क पार करने लगा। इस बात का मतलब यह नहीं था कि फास्ट वॉच से काफिला के लिए निकलना उसके लिए खतरनाक हो सकता है। पूरे स्टाफ के साथ चल रही एक एम्बुलेंस तेजी से उसी दिशा में बढ़ रही थी। बच्ची और एम्बुलेंस के बीच की दूरी तेजी से घट रही थी और हालात बेहद गंभीर हो गए थे।

मस्जिद पर मौजूद लोगों को कुछ समझ आता है, सबसे पहले उन्होंने ही एक महिला शिक्षक की नजर बच्ची पर रखी। बिना एक पल गंवाए उन्होंने तुरंत दौड़ लगाई। तेजी से, फुर्ती से और सख्त फैसले के साथ उन्होंने बच्ची को अपनी ओर खींच लिया। अगली ही पल एम्बुलेंस टीम वहां से गुजरी।

इस घटना के दौरान कुछ किताबों के लिए वहां पर शोक छा गया। लोगों को पता था कि क्या हो सकता है. लेकिन जैसे ही बच्चा सुरक्षित नजर आता है, सभी को राहत की सांस मिलती है। मौके पर मौजूद लोगों ने महिला कार्यशाला की बहादुरी और समझदारी की जोरदार लूट की।

यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि सुरक्षाकर्मी केवल कानूनी-व्यवस्था तक सीमित नहीं होते हैं, बल्कि संकट के समय मानवीय दायरे को भी पेश करते हैं। महिला डॉक्टर की साजिश और साहस ने न केवल एक मासूम की जान बचाई, बल्कि यह भी दिखाया कि सही समय पर निर्णय लिया गया कि कितनी बड़ी त्रासदी को टाला जा सकता है।

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