बिहार के नालंदा जिले के उगावां गांव में स्थित एक 400 साल पुरानी ‘खड़ी कब्र’ आज भी लोगों के बीच रहस्य, डर और आस्था का केंद्र बनी हुई है। अस्थावां प्रखंड के माह-ए-नाज़ मस्जिद परिसर में मौजूद यह मजार न सिर्फ धार्मिक महत्व रखती है, बल्कि इसे कौमी एकता की मिसाल भी माना जाता है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, यह मजार एक शक्तिशाली सूफी संत ‘जहामिया जहांगीर जहांगश्त’ की है, जिनकी दहशत इतनी थी कि उनके ऊपर से गुजरने वाला परिंदा भी सुरक्षित नहीं रहता था। पुराने समय में लोग इस स्थान से गुजरने से डरते थे। यहां तक कि कहार भी दुल्हन की डोली को आधा किलोमीटर पहले ही कंधे से उतारकर हाथों में उठाकर ले जाते थे।
हालांकि, इतिहास कुछ और कहानी बताता है। दाऊद खां क्रियाविनी को इस मजार का असली मालिक माना जाता है। बताया जाता है कि वह खुद को स्वतंत्र शासक बनाना चाहते थे। जब यह बात तक पहुंची, तो उनके गवर्नर मुनम खां ने धोखे से दाऊद खां की हत्या करवा दी। उनकी गर्दन काटकर सिर अलग दफनाया गया और धड़ को तलवार के साथ दीवार में खड़ा कर चुनवा दिया गया। इसी कारण इसे ‘खड़ी कब्र’ कहा जाता है।
कहा जाता है कि महज 28 साल की उम्र में मारे गए दाऊद खां के पास 1.4 लाख सैनिक, 3600 हाथी और 20 हजार तोपों की विशाल सेना थी। यह घटना 1574-1576 के बीच की मानी जाती है।
आज भी गांव में किसी भी शुभ कार्य से पहले लोग इस मजार पर चादर चढ़ाते हैं। हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदाय के लोग यहां आकर मन्नत मांगते हैं, जिससे यह स्थान सामाजिक सौहार्द की मिसाल बन गया है।
इतिहास, लोककथाओं और आस्था का यह अनोखा संगम नालंदा की इस ‘खड़ी कब्र’ को बेहद खास और रहस्यमयी बनाता है।
