बिहार के जमुई में नवनिर्माण अभियान के तहत जन सुराज के सूत्रधार ने राज्य की राजनीति को लेकर कई बड़े और आम सहमति दी। उन्होंने दावा किया कि बिहार का अगला मुख्यमंत्री राज्य के बजाय गुजरात के हितों को प्राथमिकता देगा।
प्रशांत किशोर ने कहा कि आने वाले समय में बिहार के युवाओं को बड़ी संख्या में काम पर लाने के लिए गुजरात भेजा जाएगा। उनका कहना है, ”बिहार के बच्चों को 10-12 हजार रुपये में रिकॉर्ड्स में शामिल किया जाएगा, क्योंकि इतनी सस्ती चीजें कहीं और नहीं होतीं।”
वे अगले पांच वर्षों को लेकर भी गंभीर भविष्यवाणी की। किशोर ने कहा कि अगर स्थिर राजनीतिक व्यवस्था जारी रहेगी, तो बिहार में मजबूती कम नहीं होगी और स्थायित्व नहीं रहेगा। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार नहीं होगा, रोजगार का अवसर नहीं आएगा और पलायन की समस्या जस की तस बनी रहेगी।
मुख्यमंत्री को लेकर भी उन्होंने बड़ा बयान दिया। किशोर ने कहा कि उन्होंने पहले ही भविष्यवाणी कर दी थी कि नीतीश कुमार पांच साल तक मुख्यमंत्री नहीं रहेंगे। अब ऐसी बन रही हैं कि उन्हें पद पर नियुक्त किया जा सकता है, किराए पर वह किराये से हो या दबाव में।
इसके साथ ही उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार जनमत के आधार पर नहीं है, बल्कि पैसे और लोकतंत्र के समर्थन के दम पर बनी है। उनका कहना था कि चुनाव में वोट शेयर और पेपर मदद से सरकार बनी है, इसलिए अब सरकार के संचालन केंद्र के नेता और उनके हाथ में रहेंगे।
डिप्टी सीएम को लेकर चल रही अटकलों पर भी वे तंज कसते हुए बोले कि ये सिर्फ अटकलें हैं, स्टालिन कुछ और है।
किशोरों की इन फिल्मों में बिहार की राजनीति में एक नई बहस जारी की गई है, जिस पर आने वाले दिनों में समर्थित प्रतिक्रिया तेज होने की संभावना है।
