बिहार के जमुई जिले में मनरेगा योजना के तहत कथित बड़े घोटाले का मामला सामने आया है। मीडिया में आने वाली खबर बिहार सरकार के ग्रामीण विकास विभाग की जांच टीम के लिए पटना से जमुई उपनगर। जांच के दौरान अधिकारियों ने कागजों में 37 पोखरे और 10 बांधों की तलाश की, लेकिन किले पर अधिकांश निर्माण नहीं हुआ।

मामला ग्राम पंचायत राज अलीगंज के मानपुर मौजा गांव और उसके आसपास का इलाका है। आरोप है कि यहां श्रमिक योजना के तहत बड़े पैमाने पर तालाब खोदाई और बांध निर्माण में बड़े पैमाने पर काम किया गया है। सरकारी कागजों में सारे काम भरे पड़े हैं, जबकि जमीन पर स्थिति अलग-अलग नजर आती है।

जांच के दौरान अधिकारियों की टीम दिन भर गांव, खेत, पहाड़, जंगल, बहियार और श्मशान घाट तक घूमती रही। शाम होने के बाद भी अधिकारी मोबाइल की रोशनी में पोखर और बांध की खोज। मौजुद पर मौजूद ग्रामीण और किसानों की भी टीम के साथ घूम-घूमकर निर्माण कार्य को तलाशते रहे।

मेन्स ने बताया कि मानपुर मौजा के उरवा पहाड़ के करीब 37 तालाब और 10 बांध के निर्माण का दावा किया गया है। लेकिन जब वास्तविक स्थिति की जांच की गई तो 37 में से केवल 7 तालाब ही तालाब पर मिले, जबकि 10 में से एक भी बांध मकबरे पर नहीं मिला।

उन्होंने यह भी बताया कि इस मामले में पहले भी मानक, डीडीसी और केंद्र सरकार के अधिकारियों पर याचिका दायर की गई थी। इसके बावजूद प्रारंभिक जांच में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। बाद में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के माध्यम से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के माध्यम से उत्तर मिला कि सभी कार्य पूरे हो गए हैं।

जांच के दौरान अधिकारियों की टीम में अभिषेक गर्ग सुनील कुमार, प्रोग्रामर अतुल पांडे, निरंजन डी नीरज कुमार समेत कई अधिकारी शामिल थे। हालांकि मीडिया के दावों से बचते हुए अधिकारियों ने कहा कि जांच रिपोर्ट में अधिकारी शामिल होंगे और इस पर कुछ भी नहीं कहा जा सकता है।

मेन्स ने चेतावनी दी है कि अगर जांच में खाना खाने की बात कही गई तो वे इस मामले को कोर्ट तक ले जाएंगे। अब सभी की नजर जांच रिपोर्ट टिकी हुई है।

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