पटना से बड़ी राजनीतिक खबर सामने आई है, जहां उन्होंने अपने ही सांसद के खिलाफ सख्त कदम उठाया है। पार्टी ने लोक सभा के लिए अपना नामांकन रद्द कर दिया है। इस कार्रवाई के पीछे पार्टी के निर्देश और आंतरिक असंतोष को मुख्य कारण बताया जा रहा है।

फ़ोरम संसदीय दल के नेताओं की ओर से नोटिस दिया गया है। अब इस मामले में एडाप्टर द्वारा सुनवाई होगी, जिसमें दोनों पक्ष अपने-अपने डाइजेस्ट शामिल हैं। गिरिधारी यादव के राजनीतिक भविष्य के लिए यह फैसला बेहद अहम माना जा रहा है।

विवाद की शुरुआत 2025 के विधानसभा चुनाव के दौरान हुई थी। आरोप है कि गिरिधारी यादव ने अपने बेटे को चुनावी मैदान में टिकट दिया और अपना समर्थन भी दिया। पार्टी ने इसे “दल-विरोधी गतिविधि” माना। हालाँकि उनके बेटे को चुनाव में हार का सामना करना पड़ा।

इसके अलावा, उन्होंने सदन में पार्टी लाइन पर एक मजबूत मुद्दा उठाया, जिससे नेतृत्व नाराज हो गया। उनके सिद्धांत से भी असंतोष की वजह बनी हुई है। साथ ही वे ‘समृद्धि यात्रा’ जैसे कार्यक्रम से भी दूर हैं।

पार्टी प्रवक्ता ने कहा कि वैज्ञानिकता के आधार पर यह कदम उठाया गया है। वहीं वरिष्ठ नेता और गिरिधारी यादव पर भी पार्टी विरोधी गुट का आरोप लगा है।

वरिष्ठ पत्रकार का आरोप है कि उसे बनाए रखने के लिए यह कार्रवाई जरूरी थी। वहीं संविधान विशेषज्ञ के, नियुक्त करने वाले का अंतिम अधिकार समाप्त हो जाता है और वे उसके अनुसार निर्णय ले सकते हैं।

गिरिधारी यादव ने खुद से कहा कि उन्होंने कभी भी पार्टी विरोधी काम नहीं किया। अब बिजनेस स्टार के जजमेंट पर नजर टिकी हुई है। यदि संस्थान समाप्त हो गया है, तो बांका की सामान्य सीट पर भी हो सकता है।

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