चैत्र नवरात्रि का आज पहला दिन है, जो हिंदू धर्म का एक प्रमुख और पावन पर्व माना जाता है. यह पर्व शक्ति की उपासना के साथ-साथ हिंदू नववर्ष की शुरुआत का प्रतीक भी है. नौ दिनों तक चलने वाले इस उत्सव में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना की जाती है और भक्त व्रत, साधना तथा भक्ति में लीन रहते हैं.

नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है, जिन्हें पर्वतराज हिमालय की पुत्री माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी समय सृष्टि की रचना आरंभ हुई थी, इसलिए चैत्र नवरात्रि को नवसंवत्सर का प्रारंभ भी कहा जाता है. इन नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ रूप—शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री—की क्रमशः पूजा की जाती है.

आज घटस्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 6:55 बजे से 7:52 बजे तक निर्धारित किया गया है. इस दौरान श्रद्धालु अपने घरों और मंदिरों में कलश स्थापना कर देवी का आह्वान करते हैं. पूजन विधि में मिट्टी के पात्र में जौ बोना, जल से भरा कलश स्थापित करना, नारियल और आम के पत्ते रखना शामिल होता है, जो समृद्धि और शक्ति का प्रतीक माना जाता है. मां शैलपुत्री को सफेद फूल, रोली और अक्षत अर्पित किए जाते हैं तथा “ॐ देवी शैलपुत्री नमः” मंत्र का जाप किया जाता है.

नवरात्रि के दौरान श्रद्धालु सात्विक जीवन शैली अपनाते हैं. व्रत रखने वाले लोग लहसुन-प्याज का त्याग करते हैं और पूजा-पाठ में अधिक समय देते हैं. कई स्थानों पर दुर्गा सप्तशती का पाठ, भजन-कीर्तन और जागरण का आयोजन भी होता है. अष्टमी या नवमी के दिन कन्या पूजन का विशेष महत्व है, जिसमें छोटी कन्याओं को देवी का रूप मानकर उनका पूजन और भोजन कराया जाता है.

चैत्र नवरात्रि केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, सकारात्मक ऊर्जा और नई शुरुआत का संदेश भी देता है. यह समय भक्ति, अनुशासन और आस्था के माध्यम से जीवन में संतुलन स्थापित करने का अवसर प्रदान करता है.

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