पटना: कहते हैं शौक़ीन इंसान की पहचान बन जाती है, लेकिन पटना का एक परिवार ऐसा है जिसने अपने शौक़ को विरासत में बदल दिया। पिंटू कुमार और उनकी पत्नी प्रिया सिंह का परिवार पिछली चार यात्राओं से दुर्लभ और ऐतिहासिक आश्चर्यों का संग्रह लेकर आ रहा है। यह अनोखा संग्रह न सिर्फ इतिहास को छोड़कर रह गया है, बल्कि नई पीढ़ी को भी इससे जोड़ा जा रहा है।

विजया सिंह बताती हैं कि शादी के बाद जब वह इस परिवार में आईं, तब उनके प्यारे राम अवतार सिंह ओल्ड जिल्कन्स से मिलना बेहद पसंद था। वह अक्सर अपने संग्रह को प्रयोगशाला परिवार और विक्रयकर्ताओं को दिखाते और उनसे जुड़ी दिलचस्प कहानियाँ सुनाते थे। यह परंपरा सबसे पहले उनके दादा हरिहर सिंह के समय से चली आ रही थी।

परिवार के पास आज भी सैकड़ों साल पुराने कई दुर्लभ सिक्के सुरक्षित हैं। ये ब्रिटिश काल के सिक्के खास आकर्षण का केंद्र हैं। संग्रह में 1884 का आधा आना, 1892 का आधा आना, 1888, 1902, 1907, 1917 और 1944 का एक आधा आना के सिक्के शामिल हैं। इसके अलावा 1894 का एक रुपया भी मौजूद है, जो उस समय बेहद कीमती माना जाता था।

शुरुआत में विजया सिंह को यह शौक थोड़ा अजीब लगता था, लेकिन मृतकों की मौत के बाद जब उन्होंने सिक्कों की वास्तविक कीमत और ऐतिहासिक महत्व के बारे में जाना, तो उन्हें एहसास हुआ कि यह एक अनमोल स्मारक है। इस संग्रह में नेपाल और अरब देशों के कुछ विदेशी सिक्के भी शामिल हैं, जो इसे और खास बनाते हैं।

अब इस विरासत को चौथी पीढ़ी से आगे बढ़ाया जा रहा है। विजया सिंह की बेटी शाव्या सिंह भी सिक्के और पुराने नोट जमा करने की शौकीन हैं। उनके सबसे अलग-अलग समय के सिक्कों के साथ 2000 रुपये का नोट भी सुरक्षित है। शाव्या बताती हैं कि शुरुआत में दोस्त इस शौक को कोई तत्व नहीं देते थे, लेकिन जब उन्हें इन सिक्कों की अहम बातें पता चलती हैं, तो वे भी हैरान रह जाते हैं।

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