ईरान-इजराइल-अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव का असर अब सीधे पटना की सड़कों और आम लोगों की थाली तक पहुंच गया है। कॉमर्शियल एलपीजी गैस सिलेंडर की किल्लत और बढ़ती कीमतों ने होटल, ढाबा, ठेला और मिठाई दुकानों की कमर तोड़ दी है। हालात ऐसे बन गए हैं कि सस्ता और साधारण खाना भी अब आम आदमी की पहुंच से धीरे-धीरे बाहर होता जा रहा है।

बाजार में महंगाई का असर साफ नजर आ रहा है। पहले ₹5 में मिलने वाली रोटी अब ₹7 में मिल रही है। सादा थाली ₹60 से बढ़कर ₹70 हो गई है। समोसा ₹12 से ₹15 और ब्रेड पकोड़ा भी ₹12 से ₹15 का हो गया है। वहीं, आलू-प्याज के पकोड़े ₹15 में दो पीस से बढ़कर ₹20 में दो पीस मिल रहे हैं। फास्ट फूड भी महंगाई की मार से नहीं बचा—चाउमीन ₹80 से ₹90 और डबल अंडा रोल ₹45 से ₹50 तक पहुंच गया है। यहां तक कि चाय की कीमत भी ₹10 से बढ़कर ₹12 हो गई है।

स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि पटना हाई कोर्ट की कैंटीन तक इस संकट की चपेट में आ गई है। यहां कुल्हड़ चाय की कीमत ₹10 से बढ़ाकर ₹12 कर दी गई है, जिससे वकीलों और दुकानदारों के बीच तीखी बहस भी देखने को मिली। चाय दुकानदारों का कहना है कि गैस नहीं मिल रही, ब्लैक में महंगे दाम पर खरीदनी पड़ रही है, ऐसे में कीमत बढ़ाना मजबूरी है। वहीं ग्राहक इसे बहाना बताकर नाराजगी जता रहे हैं।

मिठाई दुकानों पर भी संकट गहराता जा रहा है। मशहूर फ्रेंचाइजी ‘मौंगनीज’ ने गैस की कमी के चलते अपने बेकरी प्रोडक्ट पूरी तरह बंद कर दिए हैं। दुकान पर नोटिस लगाकर ग्राहकों से माफी मांगी गई है। कई अन्य दुकानों ने भी समोसा और बेकरी आइटम बनाना बंद कर दिया है।

होटल संचालकों की परेशानी भी कम नहीं है। बोरिंग रोड के एक होटल मालिक के अनुसार, गैस न तो आसानी से मिल रही है और न ही सस्ती कीमत पर। मजबूरी में पनीर चिल्ली, मंचूरियन, चिकन चिल्ली और पराठा जैसे कई व्यंजन मेन्यू से हटाने पड़े हैं। फिलहाल सीमित आइटम ही उपलब्ध हैं और इंडक्शन चूल्हे से काम चलाया जा रहा है, जिससे उत्पादन कम और समय ज्यादा लग रहा है।

छोटे दुकानदारों की हालत और भी खराब है। कई ठेला संचालकों को गैस की कमी के कारण दुकान बंद करनी पड़ रही है। कभी रिश्तेदारों से सिलेंडर लेकर काम चलाना पड़ता है तो कभी घरेलू गैस महंगे दाम पर खरीदनी पड़ रही है। बढ़ती लागत के कारण उन्हें भी खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ाने पड़ रहे हैं।

कई होटल अब पुराने दौर में लौटते हुए कोयले के चूल्हे पर खाना बना रहे हैं। लेकिन इससे भी लागत और मेहनत दोनों बढ़ रही है। कुल मिलाकर, पटना में एलपीजी संकट ने खाद्य बाजार को पूरी तरह हिला दिया है। महंगाई की यह मार सीधे आम जनता की जेब पर पड़ रही है, और लोगों को डर है कि एक बार बढ़े दाम अब आसानी से कम नहीं होंगे।

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