गिद्धेश्वर


*– सावन के तीसरे सोमवार पर विशेष रिपोर्ट*

सावन का महीना शिवभक्तों के लिए सबसे पवित्र माना जाता है। इसी क्रम में हम आपको बिहार के जमुई जिले स्थित **गिद्धेश्वर नाथ महादेव मंदिर** की पौराणिक कथा और धार्मिक महत्ता से रूबरू करा रहे हैं, जिसका इतिहास सीधे-सीधे **रामायण काल** से जुड़ा है।
गिद्धेश्वर
### **रामायण से जुड़ी अमर गाथा**

मान्यता है कि जब रावण माता सीता का अपहरण कर उन्हें लंका ले जा रहा था, तभी **जटायु** ने जमुई के इस पर्वत पर रावण से युद्ध किया। युद्ध के दौरान रावण ने जटायु के पंख काट दिए, जिससे वह पर्वत पर गिर पड़े। कहा जाता है कि जहां वे गिरे, वहां पहाड़ की चोटी पर गिद्धों का मंडराना देखा गया, इसी कारण इस स्थान का नाम पड़ा **गिद्धेश्वर**।

### **भगवान राम की गोद में त्यागे प्राण**

घायल जटायु को खोजते हुए जब **भगवान श्रीराम** पहुंचे, तो जटायु ने उन्हें रावण और सीता के बारे में बताया और फिर उनकी गोद में प्राण त्याग दिए। **भगवान राम ने यहीं उनका अंतिम संस्कार किया** और पांच तीर्थों से जल मंगवाकर जटायु को श्रद्धांजलि दी। आज भी पहाड़ पर मौजूद **पंचभूर तालाब** इसका प्रमाण देते हैं।

### **शिवलिंग पर भगवान राम ने किया जलाभिषेक**

जटायु का अंतिम संस्कार करने के बाद भगवान राम ने वहीं स्थित **स्वयंभू शिवलिंग पर जलाभिषेक** किया। प्राकृतिक रूप से जल गिरने के कारण इसे पंचभूर झरना भी कहा जाता है।

### **प्राकृतिक सुंदरता और श्रद्धा का संगम**

घने जंगल और पहाड़ों के बीच स्थित यह मंदिर न केवल आध्यात्मिक शांति का केंद्र है बल्कि पर्यावरणीय दृष्टिकोण से भी अत्यंत समृद्ध है। माना जाता है कि यहां जलाभिषेक करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

### **आस्था का केंद्र और पर्यटन की संभावना**

यह मंदिर हर सोमवार, पूर्णिमा, शिवरात्रि और विशेष रूप से **सावन में हजारों श्रद्धालुओं** से गुलजार रहता है। स्थानीय लोग मांग कर रहे हैं कि गिद्धेश्वर मंदिर परिसर को **पर्यटन स्थल** के रूप में विकसित किया जाए।

### **अब नक्सल नहीं, केवल श्रद्धा का क्षेत्र**

पहले यह क्षेत्र **नक्सल प्रभावित** था, लेकिन अब यह पूरी तरह **नक्सल मुक्त** हो चुका है और श्रद्धालु व पर्यटक यहां **निडर होकर** दर्शन के लिए आ सकते हैं।

गिद्धेश्वर नाथ महादेव मंदिर केवल आस्था का स्थल नहीं, बल्कि यह हमारी पौराणिक विरासत, प्राकृतिक सौंदर्य और सामाजिक समरसता का प्रतीक है। सावन के इस पावन अवसर पर यहां का दर्शन करना अद्भुत आध्यात्मिक अनुभव देता है।

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