बिहार के गया स्थित में अव्यवस्थाओं का अंबार सामने आया है, जहां मेडिकल छात्रों को बुनियादी सुविधाओं के लिए जूझना पड़ रहा है। कॉलेज में न सिर्फ क्लासरूम की कमी है, बल्कि रहने और खाने की व्यवस्था भी बेहद खराब स्थिति में है।
छात्रों का कहना है कि 2022 के बाद एडमिशन लेने वाले करीब 360 छात्र-छात्राओं को हॉस्टल नहीं मिला है, जिससे वे किराए के मकानों में रहने को मजबूर हैं। यह न केवल महंगा साबित हो रहा है, बल्कि सुरक्षा के लिहाज से भी जोखिम भरा है, खासकर छात्राओं के लिए जिन्हें देर रात ड्यूटी के बाद लौटना पड़ता है।
कॉलेज में कुल 600 छात्रों के लिए मात्र 168 बेड उपलब्ध हैं। चार हॉस्टल में से दो ही चालू हालत में हैं, जबकि अन्य जर्जर या मरम्मत के अधीन हैं। गर्ल्स हॉस्टल की स्थिति भी चिंताजनक है, जहां सीमित सीटों में कई बैच की छात्राएं रह रही हैं।
मेस की स्थिति और भी बदतर है। जर्जर भवन के नीचे, नाली के जमे पानी के बीच खाना बनाया जाता है। एक ही नल से पीने का पानी और बर्तन धोने का काम होता है। गंदगी और अव्यवस्था के कारण कई छात्र फूड प्वाइजनिंग का शिकार हो चुके हैं। छात्रों का आरोप है कि खाना बनाने वाली जगह पर आवारा पशु तक घूमते रहते हैं।
इन समस्याओं से परेशान होकर छात्रों ने प्रदर्शन शुरू कर दिया है। उन्होंने प्रिंसिपल कार्यालय पहुंचकर जवाब मांगा और कैंपस में विरोध मार्च निकाला। छात्रों की मांग है कि उन्हें सुरक्षित हॉस्टल, साफ-सुथरा मेस, बेहतर सड़क और स्वच्छ वातावरण उपलब्ध कराया जाए।
वहीं, प्रभारी प्रिंसिपल डॉ. शरद कुमार का कहना है कि कुछ हॉस्टलों पर अवैध कब्जा है, जिसे हटाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने आश्वासन दिया कि जल्द ही जरूरतमंद छात्रों को हॉस्टल आवंटित किया जाएगा और समस्याओं के समाधान के लिए विभाग को लगातार पत्र लिखा जा रहा है।
फिलहाल, सवाल यह है कि भविष्य के डॉक्टर ऐसे हालात में कैसे बेहतर स्वास्थ्य सेवा देने के लिए तैयार हो पाएंगे।
