बिहार के गया स्थित ऐतिहासिक गांधी मैदान में आयोजित तीन दिवसीय ‘विश्व शांति महोत्सव’ के पहले ही दिन उस समय माहौल बिगड़ गया, जब चर्चित शिक्षक खान सर के कार्यक्रम में शामिल नहीं होने की खबर फैल गई। ‘पीस एसोसिएशन ऑफ इंडिया’ के तत्वावधान में आयोजित इस महोत्सव का उद्देश्य सर्वधर्म सद्भाव और शांति का संदेश देना था, लेकिन कार्यक्रम की शुरुआत के कुछ ही समय बाद अफरा-तफरी मच गई।
महोत्सव का उद्घाटन केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी और विभिन्न धर्मों के गुरुओं एवं बुद्धिजीवियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। उद्घाटन समारोह शांतिपूर्वक संपन्न हुआ, लेकिन जैसे ही यह जानकारी सामने आई कि खान सर कार्यक्रम में नहीं पहुंचेंगे, दर्शक दीर्घा में बैठे हजारों छात्र और युवा नाराज हो गए। देखते ही देखते स्थिति बेकाबू हो गई और कुछ युवाओं ने कुर्सियां फेंकनी शुरू कर दीं।
प्रदर्शन कर रहे छात्रों का आरोप था कि आयोजकों ने खान सर के नाम का इस्तेमाल केवल भीड़ जुटाने और प्रचार के लिए किया। पोस्टर और विज्ञापनों में उनका नाम प्रमुखता से दिखाया गया था, जिसके कारण बड़ी संख्या में छात्र उन्हें सुनने के लिए कार्यक्रम में पहुंचे थे।
दरअसल, जानकारी के मुताबिक खान सर उसी दिन बोधगया में एक निजी अस्पताल के कार्यक्रम में शामिल होने गए थे। इसके बाद उन्हें अचानक पटना में एक जरूरी कार्यक्रम में जाना पड़ा। महोत्सव के सदस्य हलीम खान ने बताया कि खान सर रात करीब 10 बजे तक गया लौटकर कार्यक्रम में शामिल हो सकते हैं।
हंगामे के बावजूद मंच पर विभिन्न धर्मों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी बनी रही। कार्यक्रम में सनातन, इस्लाम, सिख और बौद्ध धर्म के कई प्रमुख धर्मगुरु शामिल हुए और शांति व एकता का संदेश दिया। हालांकि, इस दौरान सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल खड़े हुए।
कुल मिलाकर, शांति और सद्भाव के संदेश के साथ शुरू हुआ यह महोत्सव पहले ही दिन विवाद और अव्यवस्था की भेंट चढ़ गया।
