पटना: अमेरिका और ईरान के बीच करीब डेढ़ महीने तक चले युद्ध के बाद फिलहाल 14 दिन का सीजफायर लागू है, लेकिन हालात अभी पूरी तरह सामान्य नहीं हुए हैं। दोनों देशों के डिप्लोमैट्स पाकिस्तान में बातचीत कर स्थायी समाधान तलाशने की कोशिश कर रहे हैं, मगर अनिश्चितता बनी हुई है। इसका असर वैश्विक व्यापार के साथ-साथ बिहार के कारोबार पर भी साफ दिख रहा है।

पटना के बिहटा स्थित इनलैंड कंटेनर डिपो में इंपोर्ट-एक्सपोर्ट बुरी तरह प्रभावित हुआ है। पहले जहां हर महीने 12-15 कंटेनर एक्सपोर्ट और करीब 40 कंटेनर इंपोर्ट होते थे, वहीं अब यह घटकर 6-8 एक्सपोर्ट और 15 इंपोर्ट तक सीमित रह गया है। अधिकारियों के मुताबिक एक्सपोर्ट में 20-22% तक गिरावट दर्ज की गई है।

डिपो के अधिकारियों का कहना है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जारी तनाव के कारण समुद्री मार्ग बाधित है, जिससे शिपमेंट प्रभावित हो रहे हैं। बिहार से मुख्य रूप से मखाना, चावल और आम का निर्यात खाड़ी देशों में होता है, लेकिन अब ऑर्डर होने के बावजूद सामान भेजा नहीं जा पा रहा। वेयरहाउस में बड़ी मात्रा में चावल और अन्य उत्पाद जमा हैं।

स्थिति यह है कि कार्गो और मटेरियल तैयार होने के बावजूद उन्हें कोलकाता और मुंबई पोर्ट तक नहीं भेजा जा पा रहा। कई इंपोर्ट कंटेनर रास्ते में फंसे हुए हैं, जिससे आपूर्ति और बाधित हो गई है। सरकार फिलहाल केवल आवश्यक वस्तुओं जैसे तेल, गैस और खाद पर ध्यान दे रही है, जबकि इलेक्ट्रॉनिक्स, टाइल्स और मशीनरी जैसे सामान की सप्लाई प्रभावित है।

बढ़ते इंश्योरेंस और अनौपचारिक रूप से बढ़े फ्रेट चार्ज ने व्यापारियों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। महंगे ट्रांसपोर्ट के कारण कई ऑर्डर रद्द हो चुके हैं। वहीं कंटेनर समय पर वापस नहीं होने से अतिरिक्त चार्ज भी लग रहा है, जिससे लागत बढ़ रही है।

अधिकारियों के अनुसार, पिछले 45 दिनों में बिहार को करीब 225 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। गल्फ देशों के लिए कंटेनर चार्ज 10 गुना तक बढ़ गया है, जिससे व्यापार पर गहरा असर पड़ा है। अगर स्थिति जल्द नहीं सुधरी, तो आने वाले समय में महंगाई और औद्योगिक संकट और गहरा सकता है।

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