बिहार की राजनीति में नीतीश कुमार का नाम सिर्फ लंबे राजनीतिक अनुभव के लिए ही नहीं, बल्कि बार-बार इस्तीफा देने के रिकॉर्ड के लिए भी चर्चा में है। करीब पांच दशक के राजनीतिक सफर में उन्होंने एक दर्जन से अधिक बार अलग-अलग पदों से इस्तीफा दिया है, जो अपने आप में अनोखा रिकॉर्ड माना जाता है।
जेपी आंदोलन से राजनीति में कदम रखने वाले नीतीश कुमार ने दो बार विधायक, एक बार लोकसभा सांसद, एक बार विधान परिषद सदस्य और पांच बार मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिया है। इसके अलावा उन्होंने एक बार केंद्रीय मंत्री और एक बार जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद से भी इस्तीफा दिया। हाल ही में उन्होंने एमएलसी पद छोड़ा और अब मुख्यमंत्री पद से भी इस्तीफा देने की तैयारी में हैं।
उनका इस्तीफों का सिलसिला 1985 में विधायक बनने के बाद शुरू हुआ, जब 1989 में सांसद बनने पर उन्होंने विधानसभा छोड़ी। 1995 में समता पार्टी की करारी हार के बाद भी उन्होंने विधायकी से इस्तीफा दे दिया। 1999 में गाइसल रेल हादसे की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए रेल मंत्री पद छोड़ा। 2000 में बहुमत साबित नहीं कर पाने के कारण 7 दिनों में ही सीएम पद से इस्तीफा देना पड़ा।
इसके बाद भी कई बार राजनीतिक परिस्थितियों के चलते उन्होंने इस्तीफा दिया। 2014 में लोकसभा चुनाव में हार के बाद मुख्यमंत्री पद छोड़ा, 2017 में महागठबंधन से अलग होने पर इस्तीफा दिया और 2022 व 2024 में भी गठबंधन बदलते समय पद छोड़ा। 2025 में 10वीं बार मुख्यमंत्री बनने के बाद अब महज 5 महीने में फिर इस्तीफा देने जा रहे हैं।
हाल ही में राज्यसभा सदस्य बनने के बाद उन्होंने विधान परिषद से इस्तीफा दे दिया है। ऐसे में अब उनका मुख्यमंत्री पद छोड़ना तय माना जा रहा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि नीतीश कुमार ने पद से ज्यादा सिद्धांत और परिस्थितियों को महत्व दिया है, जो उन्हें बाकी नेताओं से अलग बनाता है।
