मुजफ्फरपुर: बिहार में अप्रैल महीने में ही गर्मी मई-जून जैसी महसूस होने लगी है। तेज धूप और हीट वेव के कारण अस्पतालों में मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। औराई निवासी नरेंद्र कुमार इसका उदाहरण हैं, जो काम पर जाते समय धूप लगने से बीमार पड़ गए और उन्हें चार दिनों तक नर्सिंग होम में भर्ती रहना पड़ा। डॉक्टरों ने उन्हें फिलहाल धूप से दूर रहने और आराम करने की सलाह दी है।

जिले का अधिकतम तापमान 35 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका है, जिससे आम जनजीवन प्रभावित हो रहा है। सदर अस्पताल और एसकेएमसीएच के ओपीडी में रोजाना करीब एक हजार मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। इनमें हीटस्ट्रोक, डिहाइड्रेशन, डायरिया, फूड पॉइजनिंग, टाइफाइड, पीलिया और त्वचा संबंधी समस्याएं प्रमुख हैं। डॉक्टरों के अनुसार, दोपहर 12 बजे से 4 बजे के बीच लू का खतरा सबसे ज्यादा रहता है।

बदलते मौसम का असर बच्चों पर भी साफ दिख रहा है। उल्टी-दस्त और बुखार के मामलों में वृद्धि हुई है। डॉक्टरों ने बच्चों को ओआरएस देने, धूप से बचाने और पर्याप्त भोजन कराने की सलाह दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि मई-जून में मरीजों की संख्या और बढ़ सकती है, साथ ही चमकी बुखार (AES) का खतरा भी बढ़ जाता है।

AES एक गंभीर बीमारी है, जो मुख्य रूप से बच्चों के दिमाग को प्रभावित करती है। इसके लक्षणों में तेज बुखार, बेहोशी, ऐंठन और कमजोरी शामिल हैं। समय पर इलाज न मिलने पर यह जानलेवा हो सकती है। हालांकि पिछले वर्षों में इसके मामलों में कमी आई है, फिर भी सतर्कता जरूरी है।

लू से बचाव के लिए डॉक्टरों ने कुछ अहम सुझाव दिए हैं—दोपहर में बाहर निकलने से बचें, सिर ढककर रखें, पर्याप्त पानी पिएं और ORS, नारियल पानी, लस्सी, खीरा व तरबूज का सेवन करें। साथ ही साफ पानी पीने और खुले खाद्य पदार्थों से बचने की सलाह दी गई है। थोड़ी सावधानी ही इस भीषण गर्मी में सबसे बड़ा बचाव है।

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