बिहार के नालंदा में एक ओर केंद्र और राज्य सरकारें स्वच्छता और विकास के दावे कर रही हैं, वहीं दूसरी ओर हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। मुख्यमंत्री के गृह जिले का ऐतिहासिक नालंदा रेलवे स्टेशन आज बुनियादी सुविधाओं के अभाव में बदहाली झेल रहा है।
विश्व धरोहर और अंतरराष्ट्रीय पर्यटन स्थल के करीब होने के बावजूद स्टेशन पर यात्रियों के लिए साफ पानी, पंखे और सुरक्षा जैसी मूलभूत सुविधाएं नदारद हैं। लाखों रुपये की लागत से बना नया शौचालय महीनों से बंद पड़ा है, जिस पर हमेशा ताला लटका रहता है। यात्रियों को मजबूरी में खुले में जाने या परेशानी झेलने पर मजबूर होना पड़ता है।
सबसे बड़ी समस्या ओवरब्रिज की कमी है। एक प्लेटफॉर्म से दूसरे प्लेटफॉर्म जाने के लिए लोग पटरियां पार करते हैं, जिससे हादसों का खतरा बना रहता है। हाल ही में एक यात्री ट्रेन की चपेट में आकर घायल हो गया। शाम होते ही स्टेशन पर सन्नाटा छा जाता है और सुरक्षा के नाम पर कोई पुलिस व्यवस्था मौजूद नहीं है, जिससे असामाजिक तत्वों का डर बना रहता है।
स्थानीय यात्रियों का कहना है कि रात के समय यहां रुकना सुरक्षित नहीं लगता। वहीं स्टेशन प्रबंधन के अनुसार, शौचालय का काम अधूरा होने के कारण उसे शुरू नहीं किया गया है। साथ ही, जीआरपी थाना न होने और दबंगों की धमकियों के कारण कर्मचारी भी असुरक्षित महसूस करते हैं।
यह वही स्टेशन है जहां कभी के मशहूर गाने की शूटिंग और पर हुई थी। आज वही स्टेशन अपनी पहचान और गरिमा खोता नजर आ रहा है।
पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण इस स्टेशन की स्थिति सुधारने के लिए स्थानीय लोगों ने रेलवे प्रशासन से शौचालय चालू करने, ओवरब्रिज बनाने और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग की है। अब देखना होगा कि प्रशासन कब तक इन समस्याओं का समाधान करता है।
